March 2, 2026 8:20 pm

Author - भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथा पर गहन काम किया है।
दलितों, अल्पसंख्यकों, लैंगिक मुद्दों और अन्य हाशिए के समुदायों पर लेखन के लिए जानी जाती हैं।
2005 में प्रभा दत्त संस्कृति फ़ेलोशिप से सम्मानित हुईं। 2007 में रामनाथ गोयनका पुरस्कार
(प्रिंट, हिंदी) से वर्ष की सर्वश्रेष्ठ पत्रकार के रूप में सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें
एनएफ़आई फ़ेलोशिप, पैनोस फ़ेलोशिप और परी फ़ेलोशिप भी प्राप्त हुई हैं।
दो पुस्तकों की लेखिका हैं – अनसीन (अदृश्य भारत) और शाहीन बाग: लोकतंत्र की नई करवट

एनडीए में अंदरूनी फूट, इंडिया गठबंधन में सिरफुटव्वल

बिहार में चुनावी माहौल गरम है। एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों में सीट बंटवारे और नाराज़गी का दौर जारी है। पवन सिंह की वापसी, दलित वोट बैंक और प्रशांत किशोर की सक्रियता ने...

नया गोडसे और नफरत का संगठित इकोसिस्टम

सुप्रीम कोर्ट के CJI बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की घटना ने न्यायपालिका और लोकतंत्र की नींव को हिला दिया है। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि नफरत और वैचारिक हिंसा का नया...

हमास ने मानी शर्तें, पर क्या रुकेंगे इज़रायल के ख़ूनी मंसूबे

गाज़ा पर इस्राइल की बमबारी और ट्रम्प की शांति योजना पर सवाल। क्या यह असली युद्धविराम है या सिर्फ कत्लेआम को वैध ठहराने का नया तरीका? पढ़िए पूरी पड़ताल।

बिहार SIR में ये extra 4.60 लाख वोटर कहां से जोड़ दिए चुनाव आयोग ने!

बिहार की फाइनल वोटर लिस्ट में 68.5 लाख नाम डिलीट और 21.53 लाख नए नाम जुड़े। महिलाओं और मुस्लिम इलाकों पर असर, विपक्ष ने चुनाव आयोग पर लगाया डर्टी गेम का आरोप।

ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’—शांति का वादा या जेनोसाइड की कवर स्टोरी?

फिलिस्तीन को बाहर कर गाजा में शांति का ढोंग, सब इज़रायल के लिए ट्रंप ने जो नया “बोर्ड ऑफ पीस” पेश किया, उसे लेकर दुनिया के कई हिस्सों में आक्रोश है — और सही...

गीतांजलि अंगमो ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

मोदी सरकार के सारे कदम लद्दाख को अशांति की ओर धकेलने वाले, क्यों? हालिया घटनाक्रम में लद्दाख के पर्यावरणवादी-शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने न सिर्फ स्थानीय...

मुसलमानों के ख़िलाफ़ खुलकर नफ़रत परोसने पर उतर आए हैं आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में बढ़ते भड़काऊ बयानों का विश्लेषण — राजनैतिक असर, खेल-राजनीति का कनेक्शन और सामाजिक नुकसान। पढ़ें बेबाक भाषा की रिपोर्ट।

ताजा खबर