October 15, 2026 3:46 am
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Author - भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथा पर गहन काम किया है।
दलितों, अल्पसंख्यकों, लैंगिक मुद्दों और अन्य हाशिए के समुदायों पर लेखन के लिए जानी जाती हैं।
2005 में प्रभा दत्त संस्कृति फ़ेलोशिप से सम्मानित हुईं। 2007 में रामनाथ गोयनका पुरस्कार
(प्रिंट, हिंदी) से वर्ष की सर्वश्रेष्ठ पत्रकार के रूप में सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें
एनएफ़आई फ़ेलोशिप, पैनोस फ़ेलोशिप और परी फ़ेलोशिप भी प्राप्त हुई हैं।
दो पुस्तकों की लेखिका हैं – अनसीन (अदृश्य भारत) और शाहीन बाग: लोकतंत्र की नई करवट।

देश में हर जगह मस्जिदें ढहाने की इतनी आतुरता क्यों भाजपा सरकारों में!

उज्जैन की शाही मस्जिद के हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने पर विवाद, पुलिस कार्रवाई और हाई कोर्ट के फैसले के बीच उठे कानून व भरोसे के सवाल।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भाजपा खेमे से लेकर सड़कों तक बढ़ता गुस्सा

SIR और मतदाता सूची को लेकर विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों और NDA सहयोगी चिराग पासवान...

अमेरिकी मीडिया ने क्यों किया ट्रंप का बॉयकॉट! क्या हमारा गोदी मीडिया कभी ऐसा करेगा!

Trump vs US media विवाद में CNN, MS NOW और POLITICO के बाद ABC, CBS, Fox News और NBC का टीवी पूल कवरेज रोकना और Trump TV की शुरुआत चर्चा में है। जानिए भारत के लिए इसके...

चुनाव आयोग ने उड़ाए बूथ के सारे वोटर, लोगों ने लड़ी लड़ाई तो झुकना पड़ा!

दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR के बाद 729 में से 728 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर हो गए। जानिए स्थानीय लोगों की शिकायत, चुनाव अधिकारियों का पक्ष और Form 6 की...

क्या बंगाल में मुसलमानों के खिलाफ़ BJP सरकार ने अभियान छेड़ दिया है

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम नागरिकों की हिरासत, 252 मदरसों पर कार्रवाई, ज्योतिनगर के पानी संकट और IPS बुशरा बानो के तबादले ने भेदभाव और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े...

सवाल पूछा तो पत्रकार पर सवाल!

योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता में पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के सवाल और उसके बाद सामने आए पूछताछ व नौकरी जाने के दावों ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए हैं।

तिरछी नजर

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