February 20, 2026 4:11 am
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AI summit में गलगोटिया कांड से मोदीजी का ecosystem हुआ बेनकाब!

दिल्ली AI Impact Summit में गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर विदेशी तकनीक को भारतीय बताने का आरोप। आयोजन और सरकारी दावों पर उठे गंभीर सवाल।

स्क्रीनिंग सिस्टम, सरकारी दावों और इमेज मैनेजमेंट पर उठे गंभीर प्रश्न, साख मिट्टी में मिली

दिल्ली में आयोजित इंडिया AI Impact Summit, जिसे भारत की तकनीकी क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रदर्शन का बड़ा मंच बताया जा रहा था, विवादों में घिर गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के उद्घाटन के बाद जिस तरह समिट में अव्यवस्था और आरोप-प्रत्यारोप सामने आए, उसने न सिर्फ एक निजी विश्वविद्यालय बल्कि पूरे आयोजन तंत्र और सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस विवाद के केंद्र में है Galgotias University, जिस पर विदेशी तकनीक को अपना बताकर प्रदर्शित करने और बेचने की तैयारी करने के आरोप लगे हैं।

क्या है पूरा विवाद?

समिट में आरोप लगा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने:

  • चीन में बने रोबोट डॉग को भारतीय उत्पाद बताकर प्रदर्शित किया
  • दक्षिण कोरिया की तकनीक पर आधारित ड्रोन सिस्टम को अपना नवाचार बताया
  • विदेशी उत्पादों को ‘Make in India’ और भारतीय AI इनोवेशन के रूप में पेश करने की कोशिश की

मामला तब खुला जब तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने इन उत्पादों की वास्तविक पहचान उजागर कर दी। इसके बाद आयोजन स्थल पर हंगामे की स्थिति बन गई।

सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय समिट में:

  • क्या कोई तकनीकी सत्यापन (Technical Screening) नहीं था?
  • क्या कोई क्वालिटी या ऑथेंटिसिटी चेक नहीं किया गया?

समिट एक दिन क्यों बढ़ाया गया?

विवाद और अव्यवस्था के बीच सरकार को कार्यक्रम की अवधि बढ़ाकर 21 फरवरी तक करनी पड़ी। आलोचकों का कहना है कि यह कदम आयोजन प्रबंधन की कमजोरी और संकट नियंत्रण की मजबूरी को दर्शाता है।

मंत्री के दावों पर भी विवाद

घटना का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कथित रूप से उसी रोबोट को भारतीय नवाचार बताते हुए सोशल मीडिया पर उसकी प्रशंसा की थी।
अब सवाल उठ रहे हैं:

  • क्या मंत्रालय ने भी बिना सत्यापन के प्रचार किया?
  • क्या यह तकनीकी उपलब्धि से ज्यादा इमेज मैनेजमेंट का मामला था?

स्टॉल बंद, ‘सम्मानजनक निकास’ भी नहीं

जब मामला सार्वजनिक हुआ तो:

  • गलगोटिया का स्टॉल अचानक बंद कराया गया
  • बिजली काटे जाने की भी चर्चा रही
  • आयोजकों ने विश्वविद्यालय को तत्काल हटाया

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे केवल एक संस्थान को बलि का बकरा बनाया गया, जबकि जिम्मेदारी आयोजन और निगरानी व्यवस्था की भी बनती है।

क्या यह सिर्फ एक संस्थान की गलती है?

यह विवाद एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है:

क्या समस्या केवल गलगोटिया की है, या पूरे सिस्टम की?

यदि:

  • उत्पादों की जांच नहीं हुई
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में सत्यापन तंत्र कमजोर रहा
  • सरकारी प्रचार बिना तकनीकी पुष्टि के किया गया

तो यह संस्थागत विफलता का मामला भी बनता है।

अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर

AI जैसे उभरते क्षेत्र में भारत खुद को वैश्विक नेता के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। लेकिन:

  • विदेशी तकनीक को भारतीय बताने के आरोप
  • सोशल मीडिया पर गलत दावे
  • आयोजन में अव्यवस्था

इन घटनाओं ने भारत की तकनीकी विश्वसनीयता और ब्रांड इमेज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल

दिल्ली के कई प्रमुख अखबारों और मुख्यधारा मीडिया में इस विवाद की सीमित या अनुपस्थित कवरेज को लेकर भी आलोचना हो रही है। आरोप है कि आयोजन को तकनीकी उपलब्धि से ज्यादा राजनीतिक पीआर के रूप में प्रस्तुत किया गया।

निष्कर्ष

AI Impact Summit का उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन था, लेकिन विवाद ने यह दिखा दिया कि:

  • पारदर्शिता और सत्यापन के बिना ‘इनोवेशन’ का दावा जोखिम भरा है
  • इमेज मैनेजमेंट और वास्तविक क्षमता के बीच अंतर उजागर हो सकता है
  • यदि जवाबदेही तय नहीं हुई, तो भविष्य के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है

यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय या एक स्टॉल का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जो वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी साख को पेश कर रहा है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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