January 15, 2026 7:42 am
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Author - मुकुल सरल

अरावली पर जन आंदोलनों की हुई जीत

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा बदलने वाले अपने आदेश पर रोक लगा दी है। जानिए कैसे जनआंदोलन और पर्यावरणीय चिंता ने सरकार की सिफारिशों को चुनौती दी।

असम का कार्बी आंगलोंग क्यों जल रहा है?

असम के कार्बी आंगलोंग में भड़की हिंसा के पीछे क्या हैं असली कारण? आदिवासी बनाम बाहरी विवाद, भूमि अधिकार, छठी अनुसूची और हिमंत बिस्वा सरमा सरकार की भूमिका का विस्तृत...

अब मुस्लिम उत्पीड़न का सवाल भी बर्दाश्त नहीं

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सोशल वर्क के प्रश्नपत्र में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर सवाल पूछने के बाद प्रोफेसर के निलंबन का मामला। क्या भारत में शिक्षा और अकादमिक...

नये साल के एडवांस तोहफ़े में रेल किराया बढ़ा

मोदी सरकार ने एक साल में दूसरी बार रेल किराया बढ़ाया। हादसे, देरी, बदहाल स्टेशन और सुरक्षा संकट के बीच ‘आधुनिकीकरण’ के दावे कितने खोखले हैं—पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Aravalli हमारी Lifeline लेकिन लोगों की चिंताओं को भ्रम बता रहे हैं मंत्री जी!

केंद्र सरकार की नई परिभाषा से अरावली का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र कानूनी दायरे से बाहर हो सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे खनन, निर्माण और पर्यावरणीय तबाही को...

शांति बिल कितनी अशांति लेकर आएगा!

परमाणु ऊर्जा बिल 2025 में नागरिक परमाणु दायित्व अधिनियम 2010 को खत्म करने का प्रस्ताव। जानिए यह बिल क्यों नागरिक सुरक्षा और देश के लिए खतरनाक है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने रचा इतिहास, पहली बार महिला अध्यक्ष

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के 68 साल के इतिहास में पहली महिला अध्यक्ष बनीं संगीता बरुआ। पूरे पैनल की 21-0 से जीत और गोदी मीडिया बनाम जनपक्षधर पत्रकारिता की निर्णायक लड़ाई।

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