April 17, 2026 6:45 am

Author - भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथा पर गहन काम किया है।
दलितों, अल्पसंख्यकों, लैंगिक मुद्दों और अन्य हाशिए के समुदायों पर लेखन के लिए जानी जाती हैं।
2005 में प्रभा दत्त संस्कृति फ़ेलोशिप से सम्मानित हुईं। 2007 में रामनाथ गोयनका पुरस्कार
(प्रिंट, हिंदी) से वर्ष की सर्वश्रेष्ठ पत्रकार के रूप में सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें
एनएफ़आई फ़ेलोशिप, पैनोस फ़ेलोशिप और परी फ़ेलोशिप भी प्राप्त हुई हैं।
दो पुस्तकों की लेखिका हैं – अनसीन (अदृश्य भारत) और शाहीन बाग: लोकतंत्र की नई करवट

भक्ति व चापलूसी की गजब धारा बह रही है महामानव के जन्मदिन पर!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर देशभर में ‘हैपी बर्थडे मोदी जी’ और ‘थैंक यू मोदी जी’ का माहौल। कॉरपोरेट विज्ञापनों से लेकर अडानी-अंबानी को मिले रिटर्न...

बिहार में 40,000 करोड़ की घोषणाएँ और चुनावी डील?

प्रधानमंत्री मोदी के बिहार दौरे में 40,000 करोड़ की योजनाओं की बरसात, मुफ्त राशन की गारंटी, नितीश कुमार की धमकी और अडानी को ज़मीन देने का सौदा – क्या यही है नया चुनावी...

एक-एक वोट की लड़ाई मुश्किल है, लेकिन बिहार लड़ना जानता है, जीत हमारी होगी

CPIML महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बेबाक भाषा से खास बातचीत में SIR की गड़बड़ियों, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, सीट बंटवारे, राहुल गांधी संग यात्रा और बिहार की राजनीति में...

28 महीने बाद मणिपुर पहुँचे मोदी: सवालों, पीड़ाओं और अधूरी जवाबदेही के बीच

PM मोदी 28 महीने बाद मणिपुर पहुँचे। हिंसा, विस्थापन और महिलाओं पर अत्याचार के बीच शांति-विकास का दावा, पर जवाबदेही और अफसोस नदारद।

नेपाल में राजशाही का खतरा, लेकिन जीत लोकतंत्र की होनी चाहिए

भाकपा (माले) महासचिव दिपांकर भट्टाचार्य से बेबाक बातचीत—नेपाल के जनविद्रोह, भ्रष्टाचार, बिहार SIR विवाद, वोटर अधिकार यात्रा और विपक्षी गठबंधन पर गहन विश्लेषण।

एक टेंडर, तीन कंपनियां- तीनों के मालिक रामदेव के साथी बालकृष्ण

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने खुलासा किया कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने एडवेंचर टूरिज़्म प्रोजेक्ट का टेंडर बाबा रामदेव और बालकृष्ण की कंपनियों को दिलाने के लिए...

लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता के सच्चे प्रहरी थे जगदीप छोकर

ADR के संस्थापक जगदीप छोकर का 12 सितंबर 2025 को निधन। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता, लोकतांत्रिक सुधार और "वन पर्सन, वन वोट" की लड़ाई लड़ी। पढ़ें पूरी श्रद्धांजलि।

हाउस अरेस्ट की राजनीति: क्या विरोध से डर गए हैं मोदी जी?

वाराणसी दौरे पर पीएम मोदी से पहले कांग्रेस नेता अजय राय और सैकड़ों कार्यकर्ता हाउस अरेस्ट। विपक्ष का आरोप—मोदी सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। क्या “वोट चोर गद्दी...