January 28, 2026 5:29 pm
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वोटर लिस्ट से मुसलमानों के नाम काटने का ‘डर्टी गेम’

असम, राजस्थान और गुजरात में वोटर लिस्ट की ‘शुद्धि’ के नाम पर मुसलमानों के नाम काटने के खुलासे। BLO सुमोना रहमान की साहसी गवाही।

असम, राजस्थान और गुजरात से सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

आज के हमारे कार्यक्रम की “स्टार” हैं — सुमोना रहमान चौधरी
एक युवा टीचर। एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)। और सबसे बढ़कर — एक साहसी नागरिक।

सुमोना असम से आती हैं। वही असम, जहाँ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुले मंचों से मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते दिखाई देते हैं। लेकिन उसी असम में, करीमगंज विधानसभा क्षेत्र में, सुमोना ने जो खुलासा किया, उसने पूरे देश में चल रहे एक खतरनाक खेल की परतें खोल दीं।

यह खेल है — वोटर लिस्ट की ‘शुद्धि’ के नाम पर मुसलमान मतदाताओं के नाम काटने का संगठित अभियान।

और यह सिर्फ असम की कहानी नहीं है।

राजस्थान के जयपुर से कीर्ति कुमार का खुलासा।
गुजरात के अहमदाबाद से सड़कों पर उतरे मुसलमान।
और कर्नाटक में राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए सबूत।

इन सबको जोड़ें, तो तस्वीर साफ होती है — यह एक राज्य की नहीं, पूरे देश की कहानी है।

असम: जब BLO को ही पता नहीं था कि 133 नाम काट दिए गए

सुमोना रहमान चौधरी पेशे से टीचर हैं और अपने इलाके की BLO भी हैं।
इलेक्शन कमीशन की बैठक में जब उन्हें Form-7 सौंपे गए, तो वे हैरान रह गईं।

उनकी जानकारी के बिना, उनके ही क्षेत्र से 133 मुसलमानों के नाम डिलीट कर दिए गए थे।

इनमें शामिल थे:

  • उनके स्कूल के हेडमास्टर
  • उनके छात्रों के माता-पिता
  • वे परिवार जिनके घर जाकर वे स्वयं सत्यापन कर चुकी थीं
  • जिनके हस्ताक्षर उन्होंने स्वयं चुनाव आयोग के फॉर्म पर लिए थे

तो फिर यह Form-7 भरा किसने?

सलीम अहमद केस: फर्जीवाड़े की पराकाष्ठा

सबसे चौंकाने वाला मामला है सलीम अहमद का।

उनके नाम, उनके EPIC नंबर का इस्तेमाल कर Form-7 भरा गया।
दावा किया गया कि सलीम अहमद और उनका परिवार उस इलाके में नहीं रहता।

जब सलीम अहमद को यह पता चला, तो 19 जनवरी को वे खुद अधिकारियों के पास पहुंचे।
उन्हें समझ ही नहीं आया कि उनके नाम से उनके ही खिलाफ आवेदन कैसे हो गया।

असम में ऐसे अनेक वीडियो सामने आ रहे हैं, जहाँ हिंदू मतदाता भी बता रहे हैं कि उनके EPIC नंबर का दुरुपयोग कर Form-7 भरे जा रहे हैं — और मुसलमानों के नाम कटवाए जा रहे हैं।

राजस्थान: कीर्ति कुमार पर 470 नाम काटने का दबाव

जयपुर की हवा महल विधानसभा सीट से कीर्ति कुमार का वीडियो वायरल हुआ।

वे खुलकर बताते हैं कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे 470 मुसलमान मतदाताओं के नाम काट दें

वे कहते हैं:

“मैं उनके घर गया हूँ, वे वहीं रहते हैं, फिर मैं नाम कैसे काट दूँ?”

वे यहाँ तक कहते हैं कि अगर दबाव जारी रहा तो वे आत्महत्या कर लेंगे।

यह कोई सामान्य बयान नहीं है।
देश SIR प्रक्रिया के दौरान कई BLO की आत्महत्याएँ देख चुका है।

गुजरात: “हम जिंदा हैं” कहने सड़कों पर उतरे लोग

मोडी जी का गुजरात।
अहमदाबाद का जमालपुर।

यहाँ मुसलमानों को सड़कों पर उतरकर कहना पड़ा:

“हम जिंदा हैं।”

क्योंकि वोटर लिस्ट में उन्हें “Dead” दिखाकर उनके नाम काट दिए गए थे।

बताया जा रहा है कि केवल जमालपुर क्षेत्र में 20,000 से अधिक मुसलमानों को मृत श्रेणी में डाल दिया गया।

कर्नाटक का उदाहरण: राहुल गांधी के सबूत

कर्नाटक की अलंद विधानसभा में राहुल गांधी ने सबूत पेश किए थे कि इसी तरह 6,000 नाम फर्जीवाड़े से डिलीट कर दिए गए।

कनेक्शन साफ है

असम।
राजस्थान।
गुजरात।
कर्नाटक।

राज्य अलग-अलग हैं। तरीके अलग-अलग दिखते हैं।
लेकिन पैटर्न एक ही है:

वोटर लिस्ट की शुद्धि के नाम पर मुसलमान मतदाताओं को व्यवस्थित रूप से हटाना।

सुमोना क्यों हैं ‘स्टार’?

क्योंकि उन्होंने चुप रहने से इनकार किया।
क्योंकि उन्होंने सिस्टम के भीतर रहकर सिस्टम का सच उजागर किया।
क्योंकि उन्होंने देश और दुनिया को बताया कि लोकतंत्र के सबसे बुनियादी अधिकार — वोट — पर किस तरह हमला हो रहा है। बेबाक भाषा सुमोना रहमान चौधरी को सलाम करता है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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