केरल को ‘गुजरात’ बनाने का ऑफर: मोदी जी का मॉडल और आंकड़ों की सच्चाई
“वाह मोदी जी वाह! आप केरल को गुजरात बनाना चाहते हैं!”
केरल की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो दावा किया, वह अपने आप में चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि जैसे 38-39 साल पहले गुजरात में बीजेपी कुछ नहीं थी, फिर अहमदाबाद नगर निगम से शुरुआत हुई और आज तक गुजरात बीजेपी के कब्ज़े में है—वैसा ही अब केरल में होगा। तिरुवनंतपुरम नगर निगम की एक जीत को उन्होंने उस यात्रा की शुरुआत बताया, जो कथित तौर पर केरल को ‘गुजरात के रास्ते’ पर ले जाएगी।
लेकिन सवाल यह है—क्या केरल को सचमुच गुजरात बनने की जरूरत है?
केरल बनाम गुजरात: नीति आयोग के ही आंकड़े क्या कहते हैं?
यह कोई विपक्ष के आंकड़े नहीं हैं। ये खुद नीति आयोग के पैरामीटर हैं।
- Human Development Index (HDI) में केरल भारत में नंबर वन है।
- वहीं गुजरात, इसी सूची में 20वें–25वें स्थान के आसपास खड़ा दिखता है।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ पानी, सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च—इन सभी मानकों पर केरल शीर्ष राज्यों में है।
- केरल स्वास्थ्य और शिक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाले राज्यों में शामिल है—यहां शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन पर भी सरकार सबसे अधिक निवेश करती है।
इसके उलट, गुजरात में आधे से अधिक लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। अभी हाल की घटनाएं भुलाई नहीं जा सकतीं, जब गांधीनगर में गंदे पानी की वजह से टाइफाइड फैला।
‘गुजरात मॉडल’ या ‘हाहाकार मॉडल’?
प्रधानमंत्री जिस ‘गुजरात मॉडल’ का उदाहरण देते हैं, उसी मॉडल पर गंभीर सवाल अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी उठे हैं।
दावोस में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत में मौतें टैरिफ से नहीं, बल्कि प्रदूषण से अधिक हो रही हैं। लाखों लोग दूषित हवा और पानी की वजह से जान गंवा रहे हैं।
आज देश में दो बड़ी समस्याएं हैं:
- साफ पीने का पानी नहीं
- सांस लेने के लिए साफ हवा नहीं
इन दोनों मामलों में केरल की स्थिति गुजरात से कहीं बेहतर है।
नफरत की राजनीति और हेट क्राइम्स का उभार
केरल अब तक उस सांप्रदायिक आग से अपेक्षाकृत दूर रहा है, जो कई बीजेपी-शासित राज्यों में दिखाई देती है।
- 2023 से 2025 के बीच हेट क्राइम्स में 97% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- बीजेपी-शासित राज्यों में 87% से अधिक हेट क्राइम्स दर्ज हुए।
- इनमें कश्मीरी शॉल बेचने वाले, मुस्लिम रेहड़ी वाले, छोटे कस्बों के पादरी, स्कूल-कॉलेज—सब निशाने पर रहे।
क्या यही मॉडल केरल के लिए प्रस्तावित है?
केरल मॉडल बनाम गुजरात मॉडल
| मानक | केरल | गुजरात |
| HDI रैंक | 1 | 20–25 के बीच |
| शिक्षा | शीर्ष | औसत से नीचे |
| स्वास्थ्य खर्च | सर्वाधिक | कम |
| साफ पानी | बेहतर उपलब्धता | गंभीर संकट |
| सांप्रदायिक तनाव | अपेक्षाकृत कम | बार-बार घटनाएं |
सवाल जो केरल को खुद से पूछना चाहिए
प्रधानमंत्री ने केरल को गुजरात बनने का निमंत्रण दिया है। लेकिन केरल आज भारत का मॉडल राज्य है—जहां नागरिकों के जीवन स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सौहार्द के मानक सबसे बेहतर हैं।
क्या केरल उस रास्ते पर जाना चाहेगा, जहां विकास की जगह नफरत की राजनीति, शिक्षा की जगह ध्रुवीकरण, और स्वास्थ्य की जगह प्रदूषण चर्चा का विषय बन जाए?
निष्कर्ष
तिरुवनंतपुरम नगर निगम की एक जीत को गुजरात की 40 साल पुरानी कहानी से जोड़ना राजनीतिक भाषण हो सकता है। लेकिन केरल और गुजरात की जमीनी सच्चाई आंकड़ों में दर्ज है—और वे आंकड़े खुद मोदी सरकार की एजेंसियों के हैं।
केरल को ‘गुजरात’ बनाने का ऑफर, दरअसल, केरल मॉडल को समझे बिना दिया गया प्रस्ताव है।
