October 16, 2026 7:15 am
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Author - राज वाल्मीकि

चौक पर चर्चा: मुनस्‍मृति को मानने वालो चश्‍मा ज़रा बदल कर देखो

मनुस्‍मृति है ही महिला विरोधी। उसमें महिलाओं को हमेशा गुलाम बनाए रखने की साजिश है। मनुस्‍मृति कहती है कि महिला को बचपन में पिता और भाई के अधीन रहना चाहिए। विवाह होने पर...

आंबेडकर को याद करना यानी संविधान को बचाने की लड़ाई लड़ना!

जानिए आज के दौर में बाबासाहेब आंबेडकर के विचार कितने प्रासंगिक हैं, कैसे उनकी विरासत को राजनीति में इस्तेमाल किया जा रहा है और संविधान पर क्या खतरे हैं।

दलितों को पानी का हक दिलाने के लिए बाबासाहेब ने की थी लड़ाई

20 मार्च 1927 को डॉ. आंबेडकर ने महाड़ सत्याग्रह के जरिए दलितों के पानी पीने के अधिकार के लिए ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया। जानिए पूरा इतिहास।

जाति के कीड़े अब भी ज़िंदा हैं

दलित साहित्य के अग्रणी लेखक मोहंदास नैमिशराय हमारे समय की मनुवादी राजनीति और सामाजिक विडंबनाओं पर तीखी टिप्पणी करते हैं। वे कहते हैं — “मनुवादी कीड़े अब भी जीवित हैं।”...

हमारे सिस्टम का लोगों के प्रति संवेदनशीलता से दूर-दूर तक वास्ता नहीं

डॉ. सुमित्रा महरोल की आत्मकथा “टूटे पंखों से परवाज़” और उनका साहित्यिक सफर—पोलियो से विकलांगता झेलते हुए भी शिक्षा, लेखन और समाज के लिए प्रेरणा बनना।

टीचर बन कर क्या करोगी मैडम, आप तो दलित हैं!

जानिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा माथुर का संघर्षमयी सफर, अंबेडकरवाद से उनका जुड़ाव, दलित जीवन व साहित्य पर उनके विचार और उनकी कविताएं।

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