PM CARES पर सवालों से इतनी घबराहट क्यों? क्या यह ‘इलेक्टोरल बॉन्ड नंबर-2’ है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका कार्यालय आखिर ऐसा क्या छिपाना चाहता है कि संसद के भीतर भी PM CARES, PM Relief Fund और PM Defence Fund पर सवाल पूछने पर रोक लगाने के लिए लोकसभा सचिवालय को पत्र भेजना पड़ा?
देश में बजट सत्र चल रहा है। यह वही समय होता है जब सांसद सरकार से जवाब मांगते हैं। लेकिन इसी समय PMO की ओर से निर्देश जाता है कि इन फंड्स से जुड़े किसी भी प्रश्न को स्वीकार न किया जाए। सीधे शब्दों में—सांसद सवाल नहीं पूछ सकते।
सवाल यह है कि ऐसी भी क्या पर्देदारी है?
पहले RTI से बाहर, फिर CAG से बाहर, अब संसद से भी बाहर
PM CARES फंड 2020 में कोविड महामारी के दौरान शुरू हुआ। उस समय इसे राहत और आपदा प्रबंधन के नाम पर जनता, कॉरपोरेट, सरकारी कर्मचारियों और मंत्रियों के वेतन दान से भरा गया।
लेकिन उसके बाद क्या हुआ?
- सरकार ने अदालत में कहा — यह RTI के दायरे में नहीं आता।
- जनवरी 2023 में बताया — इसका ऑडिट CAG नहीं करेगा।
- और अब — सांसद भी सवाल नहीं पूछ सकते।
यानी
न जनता पूछ सकती है,
न ऑडिट एजेंसी जांच सकती है,
न संसद सवाल कर सकती है।
तो फिर जवाबदेही किसके प्रति है?
जब पैसा प्रधानमंत्री के नाम पर लिया जाता है तो जवाबदेही क्यों नहीं?
जब इस फंड के लिए चंदा लिया जाता है, तो प्रधानमंत्री की तस्वीर, पद और सरकारी अपील का इस्तेमाल होता है।
कंपनियों से CSR के तहत पैसा लिया जाता है।
मंत्री और सरकारी कर्मचारी वेतन दान करते हैं।
तब यह “सरकारी नैतिक अपील” होती है।
लेकिन जब खर्च का हिसाब देने की बारी आती है, तो यह “गैर-सरकारी निजी ट्रस्ट” बन जाता है।
यही वह विरोधाभास है जिस पर RTI कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज जैसे लोग सवाल उठा रहे हैं।
क्या यह Electoral Bond जैसा ही कोई तंत्र है?
इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई क्योंकि चंदे की पारदर्शिता खत्म कर दी गई थी।
अब वही पैटर्न यहां दिखता है—
- कौन दे रहा है पैसा — पता नहीं
- कितना दे रहा है — पता नहीं
- बदले में क्या पा रहा है — पता नहीं
- पैसा कहां खर्च हो रहा है — पता नहीं
तो क्या PM CARES भी उसी तरह का एक अपारदर्शी चंदा तंत्र है?
6283.7 करोड़ रुपये — मार्च 2023 तक
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आख़िरी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2023 तक PM CARES फंड में ₹6283.7 करोड़ थे।
अब 2026 चल रहा है।
आज कितना है?
कहां खर्च हुआ?
किसे दिया गया?
क्यों छुपाया जा रहा है?
PM Relief Fund और PM Defence Fund भी सवालों से बाहर
अब केवल PM CARES ही नहीं, बल्कि
- PM Relief Fund (आपदाओं के समय)
- PM Defence Fund (सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए)
इन पर भी सांसद सवाल नहीं पूछ पाएंगे।
यानी जिन फंड्स का सीधा संबंध आपदा, राहत और राष्ट्रीय सुरक्षा से है, वे भी अब संसद की पहुंच से बाहर हैं।
सवाल सीधा है — जवाबदेही किससे?
जब फंड प्रधानमंत्री के नाम पर बनता है, जनता से पैसा लिया जाता है, सरकारी अपील होती है — तो फिर संसद को जवाब देने से डर कैसा?
क्या छुपाना है?
क्या यह सचमुच ‘इलेक्टोरल बॉन्ड नंबर-2’ है?
इन सवालों का जवाब प्रधानमंत्री और उनका कार्यालय कभी न कभी देना ही पड़ेगा।
