घाट के पास बुलडोज़र, मंदिरों की तोड़फोड़ और विरोध: वाराणसी में विकास के नाम पर विनाश?
“बनारस से देश के प्रधानमंत्री आते हैं, लेकिन उसी बनारस में परंपरा कुचली जा रही है”
वाराणसी—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र—इन दिनों गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक तनाव का गवाह बन रहा है। मणिकर्णिका घाट के आसपास हो रहे ध्वस्तीकरण को लेकर स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध की वजह कोई राजनीतिक अफ़वाह नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत पर चलता बुलडोज़र है।
जिस शहर को अविनाशी काशी कहा जाता है, वहाँ योगी सरकार के बुलडोज़र से मंदिरों, मूर्तियों और पुरातन संरचनाओं को तोड़ा जा रहा है। विरोध कर रहे लोग पूछ रहे हैं—क्या यही विकास है?
🕉️ मणिकर्णिका घाट: सिर्फ़ घाट नहीं, आस्था और इतिहास
मणिकर्णिका घाट कोई सामान्य स्थान नहीं है। यह हिंदू धर्म में मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। यहाँ सदियों पुरानी मूर्तियाँ, छोटे-छोटे मंदिर, गलियाँ और परंपरागत ढाँचे मौजूद रहे हैं।
लेकिन अब
- पुरानी मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं
- मंदिरों की दीवारें गिराई जा रही हैं
- काशी की पारंपरिक बनावट नष्ट की जा रही है
स्थानीय लोग कह रहे हैं कि “विकास, कॉरिडोर और चौड़ी सड़क के नाम पर श्मशान तक को नहीं छोड़ा गया।”
माँ गंगा के किनारे, मोक्ष की भूमि पर यह सब हो रहा है—और सवाल उठ रहा है कि क्या यह विकास नहीं, बल्कि विनाश है?
🚧 ‘विकास’ या सांस्कृतिक सफ़ाया?
सरकार की तरफ़ से इसे कॉरिडोर, सौंदर्यीकरण और विकास परियोजना बताया जा रहा है।
लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है—
- जिन मंदिरों को तोड़ा जा रहा है, वे अवैध नहीं, बल्कि ऐतिहासिक हैं
- जिन गलियों को मिटाया जा रहा है, वहीं से काशी की पहचान बनती है
- जिन मूर्तियों को गिराया गया, वे किसी फाइल में दर्ज ‘अतिक्रमण’ नहीं थीं
लोग कह रहे हैं कि विकास के नाम पर परंपरा को कुचला जा रहा है।
🪧 विरोध, लाठीचार्ज और गिरफ़्तारियाँ
इस तोड़फोड़ के खिलाफ़ जब स्थानीय समाज सड़कों पर उतरा तो जवाब में मिला—
- लाठीचार्ज
- गिरफ़्तारियाँ
- डर और दमन
यह विरोध किसी पार्टी का नहीं था, बल्कि उन लोगों का था जो अपनी आस्था, पहचान और इतिहास बचाना चाहते थे।
लेकिन योगी राज में विरोध की कीमत साफ़ दिखी—डंडा और जेल।
🤖 “AI Generated” कहकर सच को दबाने की कोशिश?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
- सोशल मीडिया पर जो लोग तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं,
- जो मंदिर टूटने के सबूत दिखा रहे हैं,
उनके खिलाफ़ यह कहकर कार्रवाई की जा रही है कि ये AI Generated तस्वीरें हैं।
इतना ही नहीं,
- रिपोर्ट करने वालों पर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं
- पोस्ट हटाने का दबाव बनाया जा रहा है
यानी सच दिखाओ तो अपराधी बन जाओ।
🧠 योगी राज में क्या संदेश जा रहा है?
वाराणसी की यह तस्वीर सिर्फ़ एक शहर की नहीं है।
यह बताती है—
- विरासत बनाम सत्ता
- आस्था बनाम बुलडोज़र
- सवाल बनाम दमन
जब प्रधानमंत्री के क्षेत्र में ही परंपरा को रौंदा जा रहा है,
तो देश के बाकी हिस्सों में क्या हो रहा होगा?
✊ निष्कर्ष: काशी पूछ रही है सवाल
मणिकर्णिका घाट पर चल रहा बुलडोज़र सिर्फ़ ईंट-पत्थर नहीं तोड़ रहा,
वह इतिहास, आस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर भी चल रहा है।
काशी आज पूछ रही है—
क्या विकास का मतलब स्मृति-विनाश है?
क्या विरोध अब अपराध है?
