उस्ताद, ज्ञानेश कुमार को अब देश का बच्चा बच्चा जानता है। वह पूरे देश में सबसे फेमस है
जमूरे, तू क्या देख रहा है।
उस्ताद, मैं अच्छे दिन देख रहा हूं।
अच्छे दिन, वे तुझे कहां दिख रहे हैं। और किसी को तो दिखाई नहीं दे रहे। सच तो बोल रहा है ना…
हां उस्ताद, मैं सच बोल रहा हूं।
तो जमूरे, तुझे अच्छे दिन कहां दिख रहे हैं।
सब जगह, उस्ताद।
अच्छा तो जमूरे, यह बता कि सबसे ज्यादा अच्छे दिन किसके आए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उस्ताद।
मुख्य चुनाव आयुक्त के। वह कैसे?
उस्ताद, ज्ञानेश कुमार को अब देश का बच्चा बच्चा जानता है। वह पूरे देश में सबसे फेमस है। पूरे देश में उसका बड़ा नाम हो रहा है। देश में क्या, वह विदेश में भी फेमस हो गया है।

जमूरे, तू भी अजीब बात करता है। लोग उसे गद्दार कह रहे हैं। देशद्रोही बता रहे हैं। उस पर वोट चोरी का इल्ज़ाम लगा रहे हैं। उसका इस्तीफा मांग रहे हैं। वह तो बदनाम हो रहा है।
उस्ताद, तुम भी अजीब बात करते हो। बदनाम होगे तो भी नाम तो होगा ही। वैसे भी उस्ताद, वह अजर अमर हो गया है। उस पर इस नामी बदनामी का कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह इस सबसे ऊपर उठ बस कर्म किए जा रहा है। वह कर्म जो उसके मालिक सरकार जी ने उसे सौंपा है।
जमूरे, बाकी बात छोड़। तू तो यह बता, उसके अच्छे दिन आए कैसे?
उसके अच्छे दिन आए हैं, उसकी स्वामीभक्ति से। वह अपने सरकार जी का बहुत बड़ा स्वामीभक्त है, उस्ताद।
लेकिन स्वामीभक्त तो तू भी है चेले। तेरे तो अच्छे दिन नहीं आए।
मेरी बात छोड़ो, उस्ताद। मेरे स्वामी तो आप हैं। जब आपके ही अच्छे दिन नहीं आए तो मेरे कहां से आएंगे। पर ज्ञानेश कुमार के स्वामी सरकार जी हैं। वैसे भी मैं आपका कोई गलत कहा तो मानता नहीं हूं। और वह ज्ञानेश कुमार तो सही हो या गलत, वही करता है जो उसका मालिक कहता है। इसीलिए उसके अच्छे दिन आ गए हैं।
अच्छा!
और उस्ताद उसके तो बहुत अच्छे दिन आए हैं। उसको उम्युनिटी (Immunity) जो मिल गई है।
क्यों जमूरे, क्या कोई नई बीमारी आने वाली है जिसके लिए उसे वैक्सीन लगा दी गई है।
क्या उस्ताद, तुम भी। जैसे तुम्हें कुछ पता ही नहीं है। वह इस पद पर रहते हुए जो मर्जी कर ले, चोरी-डकैती, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, उस पर केस नहीं चल सकता है।
अरे वाह! उसके तो सच में अच्छे दिन आ गए हैं। पर हमारे अच्छे दिन कब आएंगे जमूरे।
हमारे अच्छे दिन तो मुझे अभी कहीं दूर तक नहीं दिखाई दे
रहे हैं। पर उस्ताद, मुझे एक पुलिस वैन दिखाई दे रही है। दिल्ली पुलिस की वैन। उसी दिल्ली पुलिस की वैन जो केंद्र के गृहमंत्री के आधीन है। वही दिल्ली पुलिस जो छात्रों पर पैलेट गन से गोली चलाती है। जो छात्रों को कील लगे डंडो से पीटती है। वही दिल्ली पुलिस जो महिला पत्रकार के वक्ष और प्रदर्शनकारियों के नितम्ब…
जमूरे, बस कर। अश्लील मत बन।
वाह उस्ताद, जो करे वह अश्लील नहीं और मैं बोलूं तो भी अश्लील। और उस्ताद, जल्दी ही बोरिया बिस्तरा समेटो और भाग निकलो। पुलिस वैन पास ही आ गई है।
यह कहते हुए जमूरा अपनी आंखों पर बंधी पट्टी खोल उठ बैठा। उस्ताद और जमूरे ने अपना झोला उठाया और भाग निकले। मैं भी वहाँ से हट कर भीड़ में गायब हो गया।
