उस पर इस नामी बदनामी का कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह इस सबसे ऊपर उठ बस कर्म किए जा रहा है। वह कर्म जो उसके मालिक सरकार जी ने उसे सौंपा है।
Satire
अहमदाबाद के एक पार्क में कुछ लोग इकट्ठा हुए और एक किताब, ‘आई एम मलाला’ पढ़ने लगे। ‘आई एम मलाला’ पढ़ने पर पिटाई तो होनी ही थी। एक तो उस किताब की...
मोदी हैं, तो है Light, camera, action! बेबाक भाषा के दो टूक कार्यक्रम में पत्रकार भाषा सिंह बता रही हैं कि किस तरह से मोदी राज में व्यंग्य का चल रहा है बोलबाला। मोदी...
