January 20, 2026 1:47 am
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योगीराज में अब घर के अंदर नमाज़ पढ़ना भी अपराध?

बरेली में घर के अंदर नमाज़ पढ़ने पर 12 लोगों की गिरफ्तारी। योगी सरकार, पुलिसिया दमन और संविधान के अनुच्छेद 25 पर हमला।

बरेली में घर में परिजनों के साथ नमाज़ पढ़ रहे लोगों को पुलिस ने किया अरेस्ट

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के शासन में धार्मिक स्वतंत्रता अब सड़कों से हटकर घरों के अंदर तक सिमटती नज़र आ रही है। ताज़ा मामला बरेली का है, जहां 12 लोगों को केवल इस वजह से गिरफ्तार कर लिया गया कि वे एक खाली घर में एक साथ नमाज़ पढ़ रहे थे।

यह गिरफ्तारी न किसी हिंसा के आरोप में हुई, न किसी सार्वजनिक अव्यवस्था के नाम पर। आरोप बस इतना था कि कुछ लोग एक घर में इकट्ठा होकर नमाज़ पढ़ रहे थे। पुलिस ने न सिर्फ उन्हें हिरासत में लिया, बल्कि उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर दिया। सवाल यह है—यह कौन-सा कानून है, जिसमें घर के भीतर की गई शांतिपूर्ण इबादत अपराध बन जाती है?

जिस देश में हर गली-मोहल्ले में रोज़ कीर्तन होते हैं, घर-घर में जगराते और भजन-कीर्तन बिना किसी रोक-टोक के चलते हैं, उसी देश में अगर कुछ मुसलमान एक खाली घर में नमाज़ पढ़ लें, तो पुलिस कार्रवाई हो जाती है। यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि एक साफ़ राजनीतिक संदेश है—

खुले में नमाज़ पहले ही मुश्किल बना दी गई है, अब अगर लोग घर के अंदर भी इकट्ठा होकर इबादत करेंगे, तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।

संविधान बनाम योगी राज

भारत का संविधान, अनुच्छेद 25 के तहत, हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, मानने की अभिव्यक्ति करने और उसका पालन करने का मौलिक अधिकार देता है। इसमें पूजा, अर्चना, नमाज़, इबादत—सब शामिल हैं।
लेकिन उत्तर प्रदेश की ज़मीन पर संविधान से ऊपर अब योगी सरकार का फरमान चलता दिख रहा है।

बरेली की यह घटना बताती है कि काग़ज़ पर मौलिक अधिकार भले ही ज़िंदा हों, लेकिन ज़मीन पर उन्हें कुचला जा रहा है। अगर राज्य तय कर ले कि कौन कब, कहां और कैसे पूजा करेगा, तो फिर संविधान सिर्फ एक किताब बनकर रह जाता है।

यह सिर्फ मुसलमानों का मुद्दा नहीं

अक्सर यह कहा जाता है कि योगी सरकार का दमन सिर्फ मुसलमानों तक सीमित है। लेकिन हाल की घटनाएं इस भ्रम को भी तोड़ती हैं। प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जैसे साधु के साथ हुई बदसलूकी यह बताने के लिए काफी है कि योगी राज का बुलडोज़र सिर्फ एक समुदाय के लिए नहीं चलता।

जो भी सत्ता की तय की गई “लाइन” से बाहर होगा—चाहे वह मुसलमान हो, साधु-संत हो या कोई और—उसके साथ यही सुलूक होगा। यह शासन न कानून से चलता है, न संविधान से, बल्कि डर, दमन और पुलिसिया ताक़त से चलता है।

कुशासन, गुंडागर्दी और चुप्पी

यह जरूरी है कि इस तरह की घटनाओं का कड़ा विरोध हो। खासतौर पर उन तथाकथित “सनातनी हिंदुओं” को भी सोचना चाहिए, जो अब तक यह मानकर चुप थे कि योगी का कुशासन सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाता है।
आज बरेली में नमाज़ पढ़ने वाले गिरफ्तार हो रहे हैं, कल किसी और की बारी होगी।

यह मामला सिर्फ 12 लोगों की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि भारत के लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के भविष्य का सवाल है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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