नफ़रती ब्रिगेड से क्या योगी सरकार अपनी ही बेटी की रक्षा करेगी?
मेरठ की एक युवती आकांक्षा इस समय केवल अपने प्रेम के लिए नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, अपनी पसंद और अपने संवैधानिक अधिकार के लिए लड़ रही है। यह लड़ाई किसी परिवार से नहीं है, बल्कि उस संगठित नफ़रती तंत्र से है जिसे पिछले कुछ वर्षों में ‘लव जिहाद’ के नाम पर खड़ा किया गया है।
आकांक्षा ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया है कि उसे साहिल (शावेज) से प्रेम है और वह अपनी मर्ज़ी से उससे विवाह करना चाहती है। उसने साफ शब्दों में कहा है — “यहाँ न लव है, न जिहाद है, न हिंदू है, न मुसलमान है — यहाँ सिर्फ़ मेरा निर्णय है।”
लेकिन यही निर्णय अब उसके लिए खतरा बन गया है।
“मैं हिंदू नहीं, मैं बौद्ध हूँ” — आकांक्षा की स्पष्ट घोषणा
आकांक्षा बैंक में नौकरी करती है। पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर और स्पष्ट सोच वाली युवती है। उसने कैमरे पर कहा —
“मैं बौद्ध धर्म मानती हूँ। डेफिनेशन के हिसाब से मैं हिंदू भी नहीं हूँ। फिर मेरे मामले में हिंदू-मुसलमान क्यों किया जा रहा है?”
वह और साहिल दोनों बौद्ध रीति से विवाह करने जा रहे हैं। दोनों परिवार इस विवाह के लिए तैयार हैं। विवाह की तारीख 15 फरवरी तय की गई है।
लेकिन इस पूरे मामले को ‘लव जिहाद’ का रंग दिया जा रहा है।
शिकायत किसने की? और क्यों?
आकांक्षा के चाचा ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में न प्रेम संबंधों से इनकार है, न शादी से — शिकायत का आधार सिर्फ एक है: “यह लव जिहाद है।”
यही वह बिंदु है जहाँ से राज्य और नफ़रत का गठजोड़ सामने आता है।
मेरठ पुलिस की कार्रवाई: जब लड़की चिल्ला रही है, “मेरा धर्म नहीं बदला जा रहा”
जैसी आशंका थी, मेरठ पुलिस ने साहिल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है — अवैध धार्मिक परिवर्तन (Illegal Religious Conversion) के तहत।
यह वही कानून है जिसे उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ रोकने के नाम पर लाया गया था।
लेकिन यहाँ लड़की खुद कह रही है:
- मैं बौद्ध हूँ
- मैं बौद्ध ही रहूँगी
- शादी भी बौद्ध रीति से कर रही हूँ
- कोई धर्म परिवर्तन नहीं हो रहा
फिर भी मामला दर्ज हो जाता है।
यही वह स्थिति है जहाँ राज्य मशीनरी और नफ़रती भीड़ का तालमेल दिखता है।
सोशल मीडिया से सड़क तक: नफ़रती ज़ॉम्बीज़
सोशल मीडिया पर आकांक्षा और साहिल के खिलाफ अभियान चल रहा है। उन्हें देशद्रोही, धर्मद्रोही, गुमराह, साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।
यह वही ‘नफ़रती ज़ॉम्बीज़’ हैं जिन्हें सालों से ‘लव जिहाद’ की कहानियों से तैयार किया गया है। अब वे हर ऐसे प्रेम को अपना दुश्मन मानते हैं जो उनकी परिभाषा में फिट नहीं बैठता।
बड़ा सवाल: क्या योगी आदित्यनाथ अपनी ही बेटी के साथ खड़े होंगे?
यह सवाल अब सिर्फ आकांक्षा का नहीं है। यह सवाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से है।
- क्या वे एक वयस्क, आत्मनिर्भर लड़की के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करेंगे?
- या अपने ही बनाए ‘लव जिहाद’ नैरेटिव के सामने चुप रहेंगे?
- क्या राज्य एक लड़की की पसंद के खिलाफ खड़ा होगा?
आकांक्षा मेरठ की बेटी है। क्या राज्य उसके साथ खड़ा होगा?
यह लड़ाई सिर्फ आकांक्षा की नहीं है
आकांक्षा और साहिल की लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है। यह उस विचार के खिलाफ है जो प्रेम को साजिश, और शादी को अपराध में बदल देता है।
उनकी जीत या हार बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि समाज किसके साथ खड़ा होता है — नफ़रत के साथ या संविधान के साथ।
15 फरवरी को सिर्फ एक शादी नहीं होनी है। उस दिन यह भी तय होगा कि इस देश में एक बालिग महिला की अपनी पसंद की कितनी कीमत है।
