January 1, 2026 10:23 pm
Home » देशकाल » साल के आखिरी दिन ये हड़ताल पर थे, क्यों इनका साथ देना है ज़रूरी!

साल के आखिरी दिन ये हड़ताल पर थे, क्यों इनका साथ देना है ज़रूरी!

31 दिसंबर के जश्न के बीच देशभर में 4 लाख गिग वर्कर्स हड़ताल पर हैं। Swiggy, Zomato, Blinkit जैसी कंपनियों के खिलाफ सोशल सिक्योरिटी, न्यूनतम आय और इंसाफ़ की मांग।

31 दिसंबर के जश्न के बीच देशभर में गिग वर्कर्स की आवाज- ‘हमें भी जीने का अधिकार चाहिए’

जब पूरा देश साल के आख़िरी दिन यानी 31 दिसंबर को जश्न और सेलिब्रेशन में डूबा हुआ था, उसी वक्त आपके जश्न में तड़का लगाने वाले गिग वर्कर्स सड़कों पर थे—हड़ताल पर
देशभर में लगभग 4 लाख से ज़्यादा गिग वर्कर्स ने एक साथ काम बंद करने का ऐलान किया था। उनकी दो यूनियनों ने साफ़ शब्दों में कहा है—
“हमें भी जीने का अधिकार चाहिए।”

बेबाक भाषा इस हड़ताल के पक्ष में खड़ा रहा और लोगों से भी अपील की है कि एक दिन
Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Amazon, Flipkart, BigBasket जैसे किसी भी ऐप का इस्तेमाल न करें।
इन ऐप्स का बहिष्कार (Boycott) करें और गिग वर्कर्स के साथ खड़े हों।

दस मिनट की डिलीवरी की तलवार और गिग वर्कर्स की ज़िंदगी

गिग वर्कर्स का कहना है कि उन्हें एक तरह की नई गुलामी में ढकेल दिया गया है।
10 मिनट में डिलीवरी की जो तलवार उनके सिर पर लटकी रहती है, उसने न सिर्फ़ उनकी ज़िंदगी को जोखिम में डाला है, बल्कि
अनगिनत गिग वर्कर्स अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

तेज़ डिलीवरी की इस होड़ में

  • सड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं
  • एक्सीडेंट के बाद कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता
  • कोई सोशल सिक्योरिटी नहीं
  • कोई बीमा गारंटी नहीं

14–15 घंटे काम, कमाई सिर्फ़ 700–800 रुपये

यह हड़ताल इसलिए भी बेहद ज़रूरी है क्योंकि हकीकत यह है कि
गिग वर्कर्स 14–15 घंटे काम करने के बाद भी सिर्फ़ 700–800 रुपये कमा पा रहे हैं।

पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें आसमान छू रही हैं,
लेकिन पेट्रोल अपनी जेब से, बाइक अपनी, मोबाइल अपनी, इंटरनेट अपना—
और आमदनी लगातार घटती जा रही है।

यह सवाल बेहद गंभीर है कि
इतनी बड़ी-बड़ी MNC कंपनियों के सामने ये असंगठित गिग वर्कर्स आखिर कैसे लड़ें?

नया रेट कार्ड: गरिमा और रोज़गार पर सीधा हमला

गिग वर्कर्स का गुस्सा इसलिए भी फूट पड़ा है क्योंकि
कंपनियों ने नया रेट कार्ड लागू किया है—

  • मनमाने तरीके से ID ब्लॉक
  • रेटिंग के नाम पर उत्पीड़न
  • शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं
  • बिना नोटिस काम से बाहर

यह नया सिस्टम उनकी ज़िंदगी और गरिमा पर सीधा हमला है, जिसे वे अब और बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।

गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें

गिग वर्कर्स ने अपनी मांगें लिखित रूप में केंद्रीय श्रम मंत्री को भेजी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • 4 किलोमीटर तक की डिलीवरी पर कम से कम ₹35
  • ऐसा सिस्टम जिससे
    महीने के अंत में कम से कम ₹40,000 की आय सुनिश्चित हो
  • सोशल सिक्योरिटी
  • हेल्थ और एक्सीडेंट इंश्योरेंस
  • मनमानी ID ब्लॉक पर रोक

राहुल गांधी की मुलाकात और सरकार की चुप्पी

यह कोई संयोग नहीं है कि कुछ समय पहले
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गिग वर्कर्स से मुलाकात की थी
और उन्हीं मांगों को उन्होंने सार्वजनिक रूप से उठाया था।

लेकिन सवाल यह है कि
क्या मोदी सरकार गिग वर्कर्स की आवाज़ सुनेगी?

सड़क पर पिटाई, एक्सीडेंट और कोई ज़िम्मेदारी नहीं

हड़ताल के बीच भी डराने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं—

  • महाराष्ट्र में गिग वर्कर की सरेआम पिटाई
  • दिल्ली के बाराखंभा रोड पर एक्सीडेंट, कोई जिम्मेदार नहीं

यह सिस्टम गिग वर्कर्स को सिर्फ़ “डिलीवरी मशीन” समझता है, इंसान नहीं।

यह लड़ाई सिर्फ़ गिग वर्कर्स की नहीं है।
यह लड़ाई गरिमा, सुरक्षा और इंसान होने के अधिकार की है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

Read more
View all posts