बात का बतंगड़ बनाने वालों का असली मकसद है मूल मुद्दे को भटकाना
अब भाई लोग नेहा बोरा का एक बयान ले उड़े हैं और उनकी आलोचना और निंदा अभियान में जुट गए हैं। इनमें केवल भाजपाई या गोदी मीडिया के ही लोग नहीं हैं, बल्कि वे लोग भी शामिल हैं जो सुविधानुसार कभी क्रांतिकारी, कभी उदारवादी बन जाते हैं और कभी मौक़ा पाकर कट्टरवादियों की तरह व्यवहार करने लगते हैं, फ़तवे जारी करने लगते हैं। इनमें बहुत से ख़ुद को बुद्धिजीवी, कवि-लेखक, पत्रकार और यहां तक कि इतिहासकार भी कहते हैं।
मामला क्या है?
युवा आंदोलन का चेहरा और आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के एक छात्र संगठन SSF के अभी अक्टूबर में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए एकजुटता साझा करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया। जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के इन छात्र-युवाओं के आंदोलन को भी प्रेरणा का स्रोत बताया। बस इसी बात को भाजपा और गोदी मीडिया ले उड़ा और उन्हें देशद्रोही और बांग्लादेश की तरह भारत में भी हिंसा की साज़िश रचने का दोषी ठहराने लगा।
पहले आपको बता दूं कि एसएसएफ (SSF) क्या है। इस संदर्भ को जाने बिना आप नेहा के बयान का मतलब नहीं समझ सकते।
SSF यानी सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट, बांग्लादेश का एक वामपंथी छात्र संगठन है। मार्क्सवाद-लेनिनवाद इसकी विचारधारा है। जैसे भारत में आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन) की है, जिसकी नेहा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
SSF बांग्लादेश में आज से संघर्ष नहीं कर रहा है। थोड़ा सा गूगल करने पर ही जानकारी मिल जाती है कि यह संगठन शिक्षा के अधिकार, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शिक्षा व्यवस्था तथा समाजवादी विचारधारा के समर्थन में छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहा है। आज भी लड़ रहा है। इसका गठन 1984 में बांग्लादेश में सैन्य शासन के ख़िलाफ़ चल रहे छात्र आंदोलन के दौर में हुआ था। यानी तब से ये संघर्ष कर रहा है। और उसके संघर्ष से कोई भी प्रेरणा ले सकता है। जैसे आज के भारत के युवा आंदोलन से दुनियाभर के छात्र-युवा प्रेरित हो रहे हैं।

उनकी तारीफ़ करना, सेल्यूट करना यह भी सामान्य शिष्टाचार है।
लेकिन इस सबको नज़रअंदाज़ कर सवाल उठाया जा रहा है शेख हसीना सरकार के तख़्ता पलट का। तो इसकी भी असलियत सब जानते हैं। ज़रा सा याद कीजिए तो याद आ जाएगा कि इस तख़्ता पलट या उससे पहले बांग्लादेश में क्या कुछ हुआ।
शेख हसीना की अवामी लीग 2009 से लगातार सत्ता में थी। इस दौरान आर्थिक हालात के साथ-साथ विपक्ष के दमन, मनमानी गिरफ्तारियां और चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे। जनवरी 2024 के चुनाव में हसीना लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन मुख्य विपक्षी दल BNP ने चुनाव का बहिष्कार किया था।
युवाओं में सरकारी नौकरियों को लेकर असंतोष था। जून 2024 में हाईकोर्ट के एक फैसले ने 1971 के मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था फिर बहाल कर दी। ध्यान रहे इस आरक्षण का लाभ अवामी लीग के सदस्य ही उठा रहे थे।
यही वह ट्रिगर पाइंट था कि युवाओं का आंदोलन उठ खड़ा हुआ।
फिर शुरू हुआ सत्ता का क्रूर दमन। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोग मारे गए या घायल हुए। हज़ारों लोग गिरफ़्तार किए गए। यहीं से आरक्षण सुधार का आंदोलन प्रधानमंत्री हटाओ में बदल गया और तख़्ता पलट की नौबत आई। और शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी।
यानी जो बड़ी हिंसा हुई वो सत्ता की तरफ़ से हुई। जहां तक आंदोलनकारियों की तरफ़ से हिंसा का सवाल है तो वो भी हुई। कोई भी हिंसा का समर्थन नहीं करता। मैं भी नहीं करता, लेकिन किसने की और क्या हालात थे यह भी देखा जाना चाहिए। क्या उसमें बांग्लादेश का SSF भी शामिल था। ऐसी कोई जानकारी नहीं मिलती।
भारत में ही पेपर लीक आंदोलन के दौरान 20 जुलाई या अब 10 अक्टूबर से हो रहे पुलिस के दमन के बीच भी ऐसे आरोप लगे हैं कि आंदोलनकारियों ने हिंसा की। पत्थर फेंके। लेकिन यहां हम गवाह हैं कि असल में हिंसा कौन कर रहे हैं। किस तरह लंपट, गुंडे-मवाली हर आंदोलन को ख़राब करने के लिए ऐसी हिंसक कार्रवाई कर रहे हैं और लोगों को उकसा रहे हैं, सब जानते हैं।
इसलिए एक वजह से पूरे आंदोलन और उसके मकसद को ही संदेह के दायरे में लाना ठीक नहीं।
तख़्ता पलट के बाद भी बांग्लादेश में हिंसा हुई। हिंदुओं पर भी हमले हुए। तो आप समझ सकते हैं कि उसमें वहां के कट्टरवादी तत्व ही शामिल थे। एक समाजवादी छात्र संगठन जो धर्मनिरपेक्षता के लिए लड़ता है, वह नहीं। जैसे भारत में भी मुसलमानों और दलितों पर हिंसा होती है, लेकिन उसमें हम-आप तो शामिल नहीं हैं। कौन लोग हैं और उन्हें कौन संरक्षण दे रहा है, सब जानते हैं।
इसलिए जान लीजिए कि बांग्लादेश के एक वाम छात्र संगठन SSF का सम्मेलन था और उसमें भारत के वाम छात्र संगठन की ओर से नेहा ने उन्हें बधाई और शुभकामना संदेश भेजा। जैसे आज नेहा या आइसा को देश और दुनिया से बधाई संदेश मिल रहे हैं। बस इत्ती सी बात है, जिसका बतंगड़ बनाया जा रहा है। और ऐसा क्यों किया जा रहा है, यह आप सब अच्छे से जानते हैं कि आज युवाओं ख़ासकर नेहा ने सत्ता की नाक में दम कर रखा है। और यह तो कुछ नहीं, होशियार रहिए, अभी ऐसे हमले और बढ़ेंगे और साज़िशें रची जाएंगी। इसलिए ज़रा संभल कर…
