February 13, 2026 6:12 am
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राहुल गांधी ने ऐसा क्या कह दिया बौखला गई मोदी सरकार!

लोकसभा में राहुल गांधी के तीखे भाषण के बाद सियासत गरमा गई है। पीएम मोदी पर गंभीर आरोपों के बीच बीजेपी ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का एलान किया है।

लगातार हमलावर हो रहे विपक्ष के नेता — क्या यही वजह है प्रिविलेज मोशन की?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण ने बजट सत्र की दिशा ही बदल दी। सवाल यह है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्या कह दिया, ऐसे कौन से तथ्य रख दिए कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार को उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) लाने का एलान करना पड़ा?

राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने “भारत माता को बेच दिया” और अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की “आंखों में डर दिखता है” और उनका “गला दबा दिया गया है” — इशारा साफ तौर पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर था।

इतना बड़ा आरोप किसी भी सरकार के लिए असहज करने वाला होता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या संसद में विपक्ष का काम ही सरकार से कठोर सवाल पूछना नहीं है?

ट्रेड डील और कृषि क्षेत्र का मुद्दा

राहुल गांधी ने अपने भाषण में अमेरिका के साथ संभावित या मौजूदा व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि देश के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि भारत अपने कृषि क्षेत्र के हितों को इस तरह दांव पर लगा दे।

उनका आरोप था कि सरकार ने किसानों के हितों से समझौता किया है और कृषि क्षेत्र को अमेरिकी हितों के आगे खोल दिया है। उन्होंने पूरी “क्रोनोलॉजी” समझाने की बात कही और यह दावा किया कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य हैं।

जब संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को अपने आरोपों का “ऑथेंटिकेशन” करना होगा और प्रमाण देने होंगे, तो राहुल गांधी ने जवाब दिया — “मेरे पास तथ्य हैं, आप बैठिए, मैं तथ्य पेश करता हूं।”

यह पल राजनीतिक रूप से अहम था। इससे संदेश गया कि विपक्ष सिर्फ आरोप नहीं लगा रहा, बल्कि दस्तावेज़ों और तथ्यों के साथ बहस करना चाहता है।

क्या यही वजह है प्रिविलेज मोशन?

राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी गई।

यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या संसद में प्रधानमंत्री की आलोचना करना विशेषाधिकार का उल्लंघन है? या फिर यह राजनीतिक असहजता का परिणाम है?

विपक्ष का आरोप है कि सरकार नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना चाहती है। पिछले कई सत्रों में यह सवाल उठता रहा है कि राहुल गांधी को पर्याप्त समय क्यों नहीं दिया जाता। इस भाषण के बाद यह मुद्दा और तीखा हो गया है।

संसद के गलियारों में टकराव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब संसद के गलियारों में राहुल गांधी का जिक्र हो रहा था और वे खुद वहां पहुंचे, तो उन्होंने मंत्रियों से आमने-सामने चर्चा की पेशकश की। लेकिन माहौल टकरावपूर्ण रहा।

राजनीतिक संदेश साफ है — यह सिर्फ एक भाषण नहीं था, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती वैचारिक और राजनीतिक दूरी का सार्वजनिक प्रदर्शन था।

आगे क्या?

अब देखना दिलचस्प होगा कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव किस दिशा में जाता है। क्या यह संसदीय परंपराओं की रक्षा का मामला बनेगा, या फिर विपक्ष की आवाज़ को सीमित करने की कोशिश के तौर पर देखा जाएगा?

राहुल गांधी का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में संसद के भीतर सरकार को और तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है। बजट सत्र अब सिर्फ आर्थिक दस्तावेज़ों की बहस नहीं रहा — यह राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई बन चुका है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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