एफिल टावर से महिलाओं को हटाने के बाद कर्मचारियों की हड़ताल, पेरिस में मचा बवाल
पेरिस में BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटाए जाने के आरोप ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कर्मचारियों के विरोध और हड़ताल के चलते 7 सितंबर को एफिल टावर पूरे दिन बंद रहा। बाद में BAPS ने घटना पर खेद जताते हुए कहा कि यात्रा के दौरान किसी को प्रवेश से वंचित नहीं किया गया था।
पेरिस का प्रतिष्ठित एफिल टावर इन दिनों पर्यटन की वजह से नहीं, बल्कि लैंगिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर उठे एक विवाद के कारण सुर्खियों में है।
विवाद की शुरुआत 5 सितंबर 2026 को हुई, जब BAPS यानी Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha से जुड़े करीब 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर पहुंचा। यह दौरा फ्रांस में BAPS के नए स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों के बीच हुआ था।
क्या हुआ था एफिल टावर पर?
कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को उनके नियमित कार्यस्थलों से हटने के लिए कहा गया। कुछ जगहों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने का भी आरोप है।
रॉयटर्स के अनुसार, यूनियन प्रतिनिधि डायने दावोइन ने कहा कि महिलाओं को अपने कार्यस्थलों से हटाया गया ताकि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का महिलाओं से संपर्क सीमित रहे। इस घटना के बाद कर्मचारियों के बीच नाराजगी बढ़ी और उन्होंने बैठक कर विरोध दर्ज कराया।
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी Société d’Exploitation de la Tour Eiffel (SETE) ने भी माना कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिलाओं से बातचीत सीमित करने से जुड़े इंतजाम किए गए थे। कंपनी ने बाद में कहा कि ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।
विरोध में कर्मचारियों ने किया काम बंद
घटना के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने 7 सितंबर को हड़ताल कर दी। इसके चलते दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल एफिल टावर को पूरे दिन पर्यटकों के लिए बंद रखना पड़ा।
कर्मचारियों का सवाल था कि किसी धार्मिक समूह की मान्यताओं या अनुरोध के आधार पर महिला कर्मचारियों को उनके सामान्य कार्यस्थल से क्यों हटाया जाए।
पेरिस के अधिकारियों ने भी मामले को गंभीरता से लिया। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने कर्मचारियों के गुस्से को जायज बताते हुए मामले की जांच की बात कही। फ्रांस के राजनीतिक नेताओं की ओर से भी लैंगिक समानता को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई।
BAPS ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद BAPS ने एक बयान जारी कर घटना पर खेद जताया।
BAPS के मुताबिक, करीब 100 लोगों के बड़े प्रतिनिधिमंडल की वजह से यात्रा को एफिल टावर की टीम के साथ समन्वय कर सुबह के समय आयोजित किया गया था, ताकि अन्य पर्यटकों को कम से कम असुविधा हो।
संगठन ने यह भी कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एफिल टावर में प्रवेश से रोका नहीं गया।
हालांकि BAPS ने कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की बात कही और घटना से किसी को हुई परेशानी या ठेस के लिए माफी मांगी। संगठन ने अपने बयान में आपसी सम्मान और सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।
मंदिर के उद्घाटन के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब पेरिस के पास Bussy-Saint-Georges में BAPS के नए स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रम चल रहे थे।
BAPS ने सितंबर में पेरिस क्षेत्र में 13 दिवसीय ‘Festival of Culture’ का आयोजन किया है। इसी सिलसिले में 3 सितंबर को सीन नदी पर एक बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।
भारत में भी इस मंदिर के उद्घाटन को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया था।
यही वजह है कि एफिल टावर का विवाद अब केवल कर्मचारियों और एक धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के बीच का मामला नहीं रह गया है। भारत में भी इस घटना को लेकर धर्म, महिलाओं की समानता और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक मान्यताओं की भूमिका पर बहस शुरू हो गई है।
असली सवाल: धार्मिक आस्था बनाम लैंगिक समानता
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या किसी धार्मिक समूह की मान्यताओं के अनुरूप किसी सार्वजनिक स्थल के कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार किया जा सकता है?
धार्मिक स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज का महत्वपूर्ण अधिकार है। लेकिन इसके साथ ही कार्यस्थल पर समानता और भेदभाव से सुरक्षा भी आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांत हैं।
एफिल टावर विवाद में यही टकराव सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देता है। एक ओर प्रतिनिधिमंडल की धार्मिक संवेदनशीलताओं का सवाल है, तो दूसरी ओर महिला कर्मचारियों के समान अधिकार और गरिमा का प्रश्न है।
फ्रांस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लैंगिक समानता के सिद्धांत से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं BAPS ने अपनी ओर से कहा है कि उसका उद्देश्य किसी को चोट पहुंचाना या असुविधा पैदा करना नहीं था और उसने घटना पर माफी भी मांगी है।
एफिल टावर फिर खुला
हड़ताल के कारण 7 सितंबर को बंद रहने के बाद एफिल टावर 8 सितंबर को फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया।
लेकिन एक दिन के इस बंद ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या धार्मिक आस्था के नाम पर महिलाओं की मौजूदगी को सीमित करने की मांग को सार्वजनिक जीवन में स्वीकार किया जा सकता है?
एफिल टावर विवाद का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि एक धार्मिक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से शुरू हुआ मामला फ्रांस में लैंगिक समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और कार्यस्थल के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है।
