राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन से जुड़े पांच युवाओं के साथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस
दिल्ली में छात्र आंदोलन और 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पांच युवाओं को भी मंच पर बुलाया गया जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान अपने साथ हुई कथित हिंसा, पुलिस कार्रवाई और ऑनलाइन ट्रोलिंग के अनुभव साझा किए।
राहुल गांधी ने कहा कि ये छात्र संविधान, शिक्षा व्यवस्था और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों के लिए आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा नहीं की, बल्कि उनके साथ लगातार उत्पीड़न, धमकी और बल प्रयोग किया गया।
राहुल गांधी ने कहा— आंदोलन का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को आगे भी उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को लगातार सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है, वे राष्ट्रीय मीडिया के सामने बिना डरे अपनी बात रख रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah से भी सवाल किया कि वे इस मामले पर मीडिया और संसद में जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं।
रिया अहीर ने पुलिस कार्रवाई पर लगाए आरोप
मुंबई से आईं रिया अहीर ने दावा किया कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों को ले जाया जा रहा था। उनका कहना था कि उन्होंने घटना के संबंध में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कई दिन बाद भी उन्हें एफआईआर की प्रति नहीं मिली।
रिया ने मीडिया और नागरिक समाज से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह वे छात्रों के समर्थन में खड़ी हुईं, उसी तरह समाज को भी अन्याय के खिलाफ एक-दूसरे के साथ खड़ा होना चाहिए।
नूतन टोपो ने पेलेट गन इस्तेमाल करने का आरोप लगाया
झारखंड की रहने वाली नूतन टोपो ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके ऊपर पेलेट गन से फायर किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से हथियार देखा और उन्हें विश्वास है कि उनकी चोट पेलेट गन से लगी।
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अन्याय के खिलाफ फिर खड़ा होना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगी।
मुस्कान ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल मुस्कान ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान एक पुरुष सुरक्षा कर्मी ने उनके साथ बल प्रयोग किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियम महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुरुष कर्मियों द्वारा बल प्रयोग की अनुमति नहीं देते, तो उनके साथ ऐसा क्यों हुआ।
उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं तो उन्हें संतोष होगा।
ट्रोलिंग और धार्मिक पहचान पर भी उठे सवाल
मुस्कान ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उन्हें मुस्लिम बताकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि उनका नाम मुस्कान शर्मा है। उनके अनुसार सरकार की आलोचना करने वालों को धार्मिक पहचान के आधार पर ट्रोल करना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है।
फरहनाज़ ने धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया
उत्तर प्रदेश की फरहनाज़ ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लेने के बाद जब पुलिस को उनका नाम पता चला तो उनके साथ अलग व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें धार्मिक पहचान के आधार पर “देशद्रोही” कहा गया।
फरहनाज़ ने सवाल किया कि यदि कोई नागरिक शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करता है तो क्या उसे देशद्रोही कहा जाना उचित है।
भारत ने पुलिस कार्रवाई को बताया ‘ब्लैक डे’
नागपुर से आए भारत ने कहा कि वे 20 जून से आंदोलन में शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कई छात्र घायल हुए।
भारत ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं कई घायल छात्रों को एम्बुलेंस तक पहुंचाया। उन्होंने उस दिन को अपने जीवन का “ब्लैक डे” बताते हुए कहा कि यदि आंदोलन उस दिन समाप्त हो जाता तो लोकतंत्र के लिए गंभीर संदेश जाता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का राजनीतिक संदेश
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन से जुड़े युवाओं को राष्ट्रीय मंच दिया और विपक्ष की ओर से यह संकेत दिया कि यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक विमर्श में आगे भी उठाया जाएगा। वहीं मंच पर मौजूद छात्रों ने पुलिस कार्रवाई, ऑनलाइन ट्रोलिंग और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप दोहराए।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों या पुलिस की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई प्रतिक्रिया प्रस्तुत नहीं की गई।
