April 12, 2026 3:05 am
Home » देशकाल » पहली बार EVM की जांच | क्या पकड़ी जाएगी चोरी?

पहली बार EVM की जांच | क्या पकड़ी जाएगी चोरी?

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद EVM की पहली बार तकनीकी जांच होगी। क्या इससे चुनावी पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा?

बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश क्या भारत के चुनावी इतिहास में नया मोड़?

भारत के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व घटना सामने आई है। Bombay High Court के आदेश के बाद अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की तकनीकी जांच होने जा रही है। यह पहली बार है जब न्यायालय के निर्देश पर इस तरह की जांच को औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई है।

Maharashtra State Election Commission ने इस जांच के लिए 16 और 17 अप्रैल की तारीख तय कर दी है। ऐसे में यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि क्या यह जांच EVM को लेकर लंबे समय से उठ रहे संदेहों को दूर कर पाएगी या नहीं।

EVM पर भरोसे का संकट

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, जिसे तेज और पारदर्शी चुनाव का माध्यम माना गया था, पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों में रही है। आम मतदाताओं के बीच यह धारणा भी बनती जा रही है कि “वोट किसी को दिया, लेकिन जीत किसी और की हो जाती है।”

मॉक पोलिंग के दौरान भी कई बार ऐसे आरोप सामने आए कि अपेक्षा से अधिक वोट एक खास पार्टी के पक्ष में दर्ज हुए। इन घटनाओं ने EVM की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

यही कारण है कि अब विपक्ष के साथ-साथ आम जनता के बीच भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग तेज होती जा रही है।

मामला क्या है?

यह पूरा मामला एक चुनावी परिणाम से जुड़ा है, जिसमें उम्मीदवार दिलीप भाऊ को 1,24,641 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी नसीम खान को 1,04,016 वोट मिले।

हार के बाद Naseem Khan ने इस परिणाम को चुनौती दी और EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए Justice Somashekar Sundaresan ने EVM की तकनीकी जांच के आदेश दिए। हालांकि, अदालत ने चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़े अन्य आरोपों को खारिज कर दिया।

कैसे होगी जांच?

यह जांच Bharat Electronics Limited (BEL) द्वारा की जाएगी, जो EVM मशीनों का निर्माण करती है।

जांच प्रक्रिया की कुछ प्रमुख बातें:

  • कुल मशीनों के 5% की जांच होगी
  • संबंधित विधानसभा क्षेत्र की लगभग 20 मशीनें जांच में शामिल होंगी
  • जांच के दौरान:
    • बैलेट यूनिट
    • कंट्रोल यूनिट
    • VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail)
      की तकनीकी जांच की जाएगी
  • याचिकाकर्ता के विशेषज्ञ और चुनाव अधिकारी भी मौजूद रहेंगे

क्या उठ रहे हैं बड़े सवाल?

यह जांच सिर्फ एक चुनावी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत की पूरी चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में Rahul Gandhi समेत कई विपक्षी नेताओं ने EVM को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत आरोप लगाए हैं।

सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर भी EVM को लेकर अविश्वास बढ़ता जा रहा है।

आगे क्या?

अब सभी की नजरें इस जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में कोई तकनीकी गड़बड़ी सामने आती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। वहीं, अगर EVM को क्लीन चिट मिलती है, तो यह चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने का मौका भी बन सकता है।

लेकिन एक बात साफ है—EVM पर बहस अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि जनविश्वास का मुद्दा बन चुकी है।

मुकुल सरल

View all posts