April 14, 2026 12:15 am
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महिला आरक्षण बनाम परिसीमन

महिला आरक्षण को लेकर मोदी सरकार की नई सक्रियता पर उठ रहे सवाल। क्या यह महिलाओं के सशक्तिकरण का कदम है या चुनावी रणनीति? जानिए पूरा विश्लेषण।

चुनाव से पहले ‘नारी शक्ति वंदन’ का राजनीतिक पुनर्पैकेजिंग?

महिला आरक्षण को लेकर केंद्र की सरकार एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सचमुच महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की गंभीर पहल है, या फिर आगामी चुनावों से पहले एक राजनीतिक रणनीति?

Narendra Modi सरकार द्वारा 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक बुलाकर महिला आरक्षण के मुद्दे को दोबारा उछालना कई सवाल खड़े करता है। खासतौर पर तब, जब यह विधेयक 2023 में ही पास हो चुका है और उसके लागू होने की समयसीमा अब तक स्पष्ट नहीं है।

मुद्दा महिला आरक्षण का नहीं, परिसीमन का?

सरकार ने महिला आरक्षण को लागू करने के साथ दो शर्तें जोड़ दी हैं—जनगणना और परिसीमन (Delimitation)। यही असली विवाद का केंद्र बन चुका है।

विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही 33% महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जा सकता है। इसके लिए जनगणना या परिसीमन की शर्त क्यों?

Sonia Gandhi ने भी इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा है कि असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है, जो देश के राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

चुनावी राज्यों में अचानक सक्रियता क्यों?

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब West Bengal और Tamil Nadu जैसे राज्यों में चुनावी माहौल बन रहा है।

यह सवाल स्वाभाविक है कि:

  • क्या सरकार के पास इन राज्यों में दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है?
  • क्या महिला आरक्षण को एक चुनावी मुद्दे के रूप में फिर से पेश किया जा रहा है?

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, और यहां सीधा कैश ट्रांसफर जैसी योजनाओं के जरिए वोट जुटाना आसान नहीं है।

पश्चिम बंगाल का उदाहरण: क्या बीजेपी के दावे कमजोर पड़ते हैं?

पश्चिम बंगाल में पहले से ही महिला प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत अधिक है।

  • तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पास लगभग 39% महिला सांसद हैं
  • जबकि भाजपा के पास मात्र 13% महिला सांसद

ऐसे में विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि जब किसी कानून में बाध्यता नहीं है, तो भाजपा खुद 33% या 50% महिलाओं को टिकट क्यों नहीं देती?

परिसीमन का राजनीतिक गणित

परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण। लेकिन अगर यह प्रक्रिया 2026 की जनगणना से पहले की जाती है, तो यह कई राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगाड़ सकती है।

विपक्ष का आरोप है कि:

  • सरकार किसी “अज्ञात फार्मूले” के आधार पर परिसीमन लागू करना चाहती है
  • महिला आरक्षण को एक “कवच” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि इस पर सवाल न उठें

संवैधानिक संशोधन पर भी सवाल

विपक्षी दलों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या सरकार अपने ही किए गए संवैधानिक संशोधन को बदलने जा रही है?

कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि:

  • 30 महीने के भीतर ही एक संवैधानिक संशोधन को बदलने की बात हो रही है
  • इससे सरकार की नीयत और नीति दोनों पर सवाल खड़े होते हैं

निष्कर्ष: नारी शक्ति या चुनावी रणनीति?

महिला आरक्षण निस्संदेह एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है। लेकिन जब इसे बार-बार चुनावों के आसपास उठाया जाता है, और उसके साथ जटिल शर्तें जोड़ी जाती हैं, तो इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है।

असल सवाल यही है—
क्या सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है, या यह सिर्फ एक चुनावी नैरेटिव है?

मुकुल सरल

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