टमाटर के नहीं मिल रहे दाम, पर कृषि मंत्री कर रहे अपना गुणगान!
देश की संसद में खड़े होकर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan जब यह दावा करते हैं कि उनकी और प्रधानमंत्री की नीतियों की वजह से किसानों की आय दोगुनी ही नहीं, बल्कि कहीं-कहीं तीन गुनी, चार गुनी और आठ गुनी तक बढ़ी है, तो यह सवाल उठना लाज़मी है—क्या ज़मीनी हकीकत भी यही कहती है?
संसद के दावे बनाम ज़मीन की सच्चाई
संसद में दिए गए बयान में कृषि मंत्री पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि देश के किसानों की आय में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। लेकिन उसी देश में, उसी समय, किसान अपनी मेहनत की उपज को सड़कों पर फेंकने को मजबूर हैं।
महाराष्ट्र से सामने आई एक तस्वीर इस दावे की पोल खोलती है। एक किसान, जिसने 250 क्विंटल (लगभग 25,000 किलो) टमाटर उगाया, उसे अपनी पूरी फसल सड़क पर फेंकनी पड़ी। वजह? बाजार में उसे टमाटर का दाम मात्र 4 रुपये प्रति किलो मिल रहा था—जो लागत निकालने के लिए भी नाकाफी है।
मेहनत का फल या मजबूरी का दर्द?
वह किसान कैमरे के सामने रोते हुए बताता है कि कैसे उसने दिन-रात मेहनत की, अच्छी फसल उगाई, लेकिन जब बेचने का समय आया, तो उसे उचित मूल्य नहीं मिला। सवाल सीधा है—क्या यही “आठ गुनी आय” है जिसका दावा संसद में किया जा रहा है?
यह कोई अकेली घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी खबरें लगातार आती रहती हैं—
- कहीं किसान आलू फेंक रहा है
- कहीं प्याज सड़कों पर बिखरा पड़ा है
- और कहीं टमाटर
हर जगह कहानी एक ही है—मेहनत ज़्यादा, दाम कम, और सिस्टम नाकाम।
कृषि नीति या आंकड़ों का खेल?
सरकार के दावों और किसानों की वास्तविक स्थिति के बीच यह गहरी खाई कई सवाल खड़े करती है। क्या कृषि नीतियाँ वास्तव में किसानों के हित में काम कर रही हैं, या सिर्फ आंकड़ों और भाषणों तक सीमित हैं?
किसान आज भी MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी, बेहतर बाजार व्यवस्था और लागत के अनुसार उचित मूल्य की मांग कर रहा है। लेकिन इन मांगों के बजाय उसे मिल रहा है—उपेक्षा, अस्थिरता और नुकसान।
“आय बढ़ी” या “दर्द बढ़ा”?
जब एक तरफ मंत्री संसद में किसानों की आय कई गुना बढ़ने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ किसान अपनी फसल को सड़कों पर फेंकने को मजबूर होता है, तो यह सिर्फ विरोधाभास नहीं, बल्कि एक गंभीर नीति-गत विफलता का संकेत है।
यह “ड्रामा” नहीं, बल्कि देश के अन्नदाता की त्रासदी है—जो हर सीजन के साथ और गहरी होती जा रही है।
