April 10, 2026 2:53 am
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क्या असम में Gen Z राजनीति से घबराई सत्ता?

असम के मुख्यमंत्री हिमन्ता बिस्वा सरमा और Gen Z उम्मीदवार कुंकी चौधरी के बीच बढ़ता विवाद—बीफ राजनीति, AI वीडियो और Guwahati Central सीट का बड़ा चुनावी संघर्ष।

कुंकी चौधरी बनाम Himanta Biswa Sarma की लड़ाई का बड़ा संकेत

असम की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प लेकिन गंभीर टकराव देखने को मिल रहा है। एक तरफ हैं राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, और दूसरी तरफ एक नई, युवा, Gen Z चेहरा—Kunki Chowdhury। सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक विधानसभा सीट की लड़ाई है या फिर बदलती राजनीति का डर सत्ता के शीर्ष तक पहुंच गया है?

पहली बार चुनाव, लेकिन नई राजनीति की आहट

27 साल की कुंकी चौधरी Guwahati सेंट्रल सीट से चुनाव लड़ रही हैं। यह सीट 2023 के परिसीमन के बाद बनी नई सीट है, जो पहले Guwahati West का हिस्सा थी।

कुंकी Asom Gana Parishad (AGP) की उम्मीदवार हैं, जो कांग्रेस गठबंधन के तहत मैदान में हैं। यह उनका पहला चुनाव है, लेकिन वे लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं।

उनकी खासियत सिर्फ उम्र नहीं है—बल्कि उनका दृष्टिकोण है। लंदन से एजुकेशन लीडरशिप में मास्टर्स करने के बाद उन्होंने “People First” के नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरकर पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी है।

“स्थानीय बनाम बाहरी” का उभरता मुद्दा

इस सीट पर एक और बड़ा विमर्श उभरकर सामने आया है—स्थानीय बनाम बाहरी।
कुंकी चौधरी जहां गुवाहाटी की निवासी हैं और एक ऐसे परिवार से आती हैं जो असम में शिक्षा संस्थानों से जुड़ा ट्रस्ट चलाता है, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी Vijay Gupta के पूर्वजों को “बाहरी” के रूप में पेश किया जा रहा है।

यह नैरेटिव शहरी असम की कई सीटों पर असर डाल सकता है और यही कारण है कि यह चुनाव अब सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा।

मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत हमले और बीफ विवाद

इस पूरे चुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने वाली बात है मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के लगातार व्यक्तिगत हमले।

सबसे बड़ा विवाद “बीफ” को लेकर खड़ा किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल की गईं, जिनमें कुंकी के परिवार पर बीफ खाने के आरोप लगाए गए।

हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि Assam में बीफ पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन सार्वजनिक उपभोग को लेकर नियम सख्त हैं। इसके बावजूद इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उछाला गया।

मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि अगर कानून सख्त है, तो “वे इसे सार्वजनिक रूप से कैसे खा सकते हैं?”—जिससे विवाद और गहरा गया।

AI वीडियो और FIR: डिजिटल राजनीति का नया मोर्चा

कुंकी चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ फर्जी AI-generated वीडियो फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए Bharatiya Janata Party (BJP) को जिम्मेदार ठहराया और FIR दर्ज कराई है।

यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि डिजिटल नैतिकता और चुनावी पारदर्शिता का भी बन गया है।

Gen Z बनाम सत्ता: क्यों घबराहट?

सबसे अहम सवाल यही है—क्या एक युवा उम्मीदवार को इतना महत्व देना सत्ता की घबराहट को दर्शाता है?

एक तरफ एक अनुभवी मुख्यमंत्री, दूसरी तरफ पहली बार चुनाव लड़ रही एक युवा महिला—लेकिन जिस तरह से यह मुकाबला हाई-प्रोफाइल बन गया है, वह संकेत देता है कि यह सिर्फ सीट नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश की लड़ाई है।

कुंकी को देशभर से प्रगतिशील समूहों और युवाओं का समर्थन मिल रहा है, जो इसे “नई राजनीति” बनाम “पुरानी सत्ता” के रूप में देख रहे हैं।

9 अप्रैल का फैसला: सिर्फ एक सीट नहीं

अब निगाहें 9 अप्रैल पर टिकी हैं, जब Guwahati Central और पूरे असम के मतदाता अपना फैसला सुनाएंगे।

यह चुनाव तय करेगा कि क्या असम की राजनीति में नई पीढ़ी के लिए जगह बन रही है, या फिर पारंपरिक सत्ता ढांचा अभी भी पूरी तरह हावी है।

मुकुल सरल

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