August 24, 2026 1:16 am
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आज का GenZ ज़्यादा confident है, अपनी चुनौतियों को समझता है

शर्मिला टैगोर ने मानसिक स्वास्थ्य, परिवार की भूमिका और Gen Z के बदलाव पर बात की। उन्होंने कहा कि आज की Gen Z में अपनी बात कहने का आत्मविश्वास और भाषा है।

शर्मिला टैगोर ने कहा- मानसिक सेहत पर खुलकर बोलना जरूरी

दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को अक्सर लोग समझ नहीं पाते और उन्हें अलग-अलग नाम देकर टाल दिया जाता है। ऐसे में परिवार से लेकर समाज तक मानसिक बीमारी को समझने और उसके सही इलाज के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।

एक बातचीत के दौरान शर्मिला टैगोर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहे लोगों को कई बार यह कहकर खारिज कर दिया जाता है कि वे ‘मुश्किल’ हैं या उनका व्यवहार सामान्य नहीं है। जबकि वास्तव में उन्हें समझ, सहयोग और चिकित्सकीय मदद की जरूरत हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूकता की जरूरत

शर्मिला टैगोर के मुताबिक मानसिक बीमारी को लेकर सबसे पहली जरूरत इसे समझने की है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कई अलग-अलग रूपों में सामने आ सकती हैं। इनमें डिप्रेशन, सीखने से जुड़ी कठिनाइयां और दूसरी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि परिवार इस पूरी प्रक्रिया का शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। परिवार को यह समझना चाहिए कि समस्या किस तरह की है और उसके अनुसार सही मदद उपलब्ध करानी चाहिए।

शर्मिला टैगोर ने मानसिक स्वास्थ्य के इलाज में प्यार, धैर्य और सही चिकित्सकीय मदद को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक शुरुआती स्तर पर समस्या की पहचान और समय पर मेडिकल सहायता मिलने से स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

अंधविश्वास की जगह मेडिकल साइंस को समझना जरूरी

मानसिक स्वास्थ्य पर बात करते हुए शर्मिला टैगोर ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद सामाजिक और पारंपरिक मान्यताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को मेडिकल नजरिए से नहीं देखा जाता।

उन्होंने बताया कि पहले मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कई बार इस तरह समझा जाता था कि किसी व्यक्ति पर कोई बाहरी शक्ति हावी हो गई है। ऐसी धारणाओं के कारण लोग मेडिकल सहायता लेने के बजाय पारंपरिक उपचार की ओर चले जाते हैं।

शर्मिला टैगोर ने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि पहले समस्या को समझा जाए और फिर उसके मुताबिक इलाज कराया जाए।

‘आज की Gen Z में अपनी बात कहने का आत्मविश्वास है’

Gen Z के बदलते व्यवहार और अपनी समस्याओं पर खुलकर बोलने को लेकर पूछे गए सवाल पर शर्मिला टैगोर ने कहा कि आज की पीढ़ी में अपनी बात रखने का आत्मविश्वास पहले की तुलना में कहीं अधिक है।

उन्होंने कहा कि आज की Gen Z के पास आत्मविश्वास है, अपनी बात को व्यक्त करने की भाषा है और वे अपनी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझती है।

शर्मिला टैगोर के मुताबिक जब कोई व्यक्ति खुद अपनी समस्या के बारे में बोलता है तो उसका असर ज्यादा होता है। उनके अनुसार मानसिक स्वास्थ्य के मामले में यह बदलाव एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

‘हमारी पीढ़ी में बोलने की स्थिति नहीं थी’

अपनी पीढ़ी और आज की Gen Z के बीच अंतर बताते हुए शर्मिला टैगोर ने कहा कि वह बंगाल से आती हैं और ऐसे परिवार में पली-बढ़ी हैं जहां असहमति जताने और सवाल करने की आजादी थी।

उन्होंने कहा कि अगर उनसे कोई काम करने के लिए कहा जाता था तो उनका पसंदीदा सवाल होता था- ‘क्यों?’

हालांकि, उन्होंने माना कि हर परिवार में बच्चों, खासकर लड़कियों को अपनी बात कहने की इतनी आजादी नहीं मिलती थी। कई परिवारों में बच्चों से उम्मीद की जाती थी कि वे तय किए गए सामाजिक ढांचे के मुताबिक ही व्यवहार करें।

शर्मिला टैगोर ने कहा कि स्थिति में बदलाव आया है। आज बच्चे स्कूल और कॉलेज जा रहे हैं, उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा exposure मिल रहा है और टेलीविजन व दूसरे माध्यमों के जरिए वे अपनी बात रखना और खुद को व्यक्त करना सीख रहे हैं।

फिल्मों में भी मानसिक स्वास्थ्य की समझ बढ़ी

फिल्मों में मानसिक स्वास्थ्य के चित्रण को लेकर शर्मिला टैगोर ने कहा कि पहले इस विषय को हमेशा सही तरीके से नहीं समझा जाता था। कई बार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बिना पूरी समझ के दिखाया जाता था और उन्हें हास्य का विषय भी बना दिया जाता था।

हालांकि, उनका मानना है कि अब इस विषय को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है। आज फिल्मकार मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर काम करने से पहले अधिक रिसर्च करते हैं और इसे अपमानजनक या मजाकिया तरीके से पेश करने की संभावना पहले की तुलना में कम है।

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में समझ बढ़ना जरूरी है, क्योंकि यह भी स्वास्थ्य से जुड़ी एक वास्तविक समस्या है और इससे जूझ रहे लोगों को मजाक या उपेक्षा नहीं, बल्कि समझ और उचित इलाज की जरूरत होती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना बदलाव की शुरुआत

शर्मिला टैगोर की बातचीत का एक अहम संदेश यह रहा कि मानसिक स्वास्थ्य को छिपाने या कलंक से जोड़ने के बजाय उसके बारे में खुलकर बात की जानी चाहिए। परिवार, स्कूल और समाज अगर शुरुआती संकेतों को समझें और समय पर मदद उपलब्ध कराएं तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

उनके मुताबिक Gen Z का अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर बोलना इस बदलाव का एक सकारात्मक संकेत है। अपनी परेशानी को शब्द देना और मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समस्या को समझने और उससे निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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