August 19, 2026 4:40 pm
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अपनी पिछली करतूतों को मिटाने में लगी है भाजपा IT cell की नई टीम

BJP IT Cell में अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी मिली है। नई टीम के कुछ सदस्यों के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों को लेकर उठे सवालों की पड़ताल।

पुराने सोशल मीडिया पोस्ट, गोडसे विवाद और ‘नफरत की राजनीति’ के आरोप

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के IT और सोशल मीडिया संगठन में हालिया बदलाव ने पार्टी की डिजिटल रणनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लंबे समय से BJP IT Cell का नेतृत्व कर रहे अमित मालवीय की जगह अब दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह बदलाव BJP के संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा है और नई टीम के सामने पार्टी के डिजिटल नैरेटिव को मजबूत करने की चुनौती है।

लेकिन नई टीम के गठन के साथ ही सोशल मीडिया पर इसके कुछ सदस्यों के पुराने पोस्ट और कथित विवादित टिप्पणियां भी चर्चा में आ गई हैं। विपक्षी नेताओं और आलोचकों का आरोप है कि BJP की नई डिजिटल टीम में ऐसे लोगों को जगह दी गई है, जिनके पुराने सोशल मीडिया बयानों में गांधी, कांग्रेस नेताओं, मुसलमानों और आरक्षण को लेकर बेहद तीखी भाषा दिखाई देती है।

अमित मालवीय के बाद दीपक म्हस्के को मिली कमान

अमित मालवीय करीब एक दशक से अधिक समय तक BJP के IT Cell का प्रमुख चेहरा रहे। हालिया संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें इस जिम्मेदारी से हटाकर दीपक म्हस्के को नया IT Cell प्रमुख बनाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक म्हस्के का पार्टी के IT और सोशल मीडिया संगठन से लंबे समय का जुड़ाव रहा है और उन्होंने कई चुनावों में डिजिटल अभियानों में भूमिका निभाई है।

म्हस्के ने अपनी नियुक्ति के बाद कहा है कि BJP का सोशल मीडिया विभाग प्रचार का मुकाबला करने, गलत धारणाओं को दूर करने और पार्टी का पक्ष प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान देगा।

यानी BJP की ओर से नई टीम को डिजिटल संचार और नैरेटिव की लड़ाई के लिए तैयार किए जाने का संकेत साफ है।

नई टीम के सदस्यों के पुराने पोस्ट बने सवाल

वीडियो कार्यक्रम में BJP IT Cell की नई टीम के कुछ सदस्यों के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कार्यक्रम का आरोप है कि नियुक्तियों के बाद कुछ लोगों ने अपने X अकाउंट को प्राइवेट किया या पुराने पोस्ट हटाए।

हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा अपना सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट करना या पुराने पोस्ट हटाना अपने आप में किसी अपराध या गलत आचरण का प्रमाण नहीं है। ऐसे दावों की पुष्टि के लिए मूल पोस्ट, उनके आर्काइव और नियुक्ति से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

प्रीति गांधी और नाथूराम गोडसे को लेकर पुराना विवाद

BJP से जुड़ी प्रीति गांधी के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट पहले भी विवाद का विषय रहे हैं। Alt News और The Wire की पुरानी रिपोर्टों में उनके नाम से किए गए ऐसे पोस्ट उद्धृत किए गए हैं जिनमें गांधी उपनाम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी और नाथूराम गोडसे के प्रति सकारात्मक रुख दिखाई देता है।

यही वजह है कि उनकी नई संगठनात्मक भूमिका को लेकर आलोचकों ने पुराने बयानों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, किसी व्यक्ति के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर उसकी वर्तमान राजनीतिक भूमिका या पूरे संगठन की विचारधारा के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले पोस्ट की तारीख, संदर्भ और वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है।

अल्पसंख्यकों और आरक्षण को लेकर भी सवाल

वीडियो में BJP IT Cell से जुड़े अन्य सदस्यों के कथित सोशल मीडिया बयानों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय के मतदान अधिकार और आरक्षण को लेकर कथित टिप्पणियां शामिल हैं।

कार्यक्रम में आरक्षण को ‘कैंसर’ बताए जाने वाले कथित बयान का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया गया है कि यदि पार्टी एक ओर दलित समुदाय तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर उससे जुड़े डिजिटल कार्यकर्ताओं के ऐसे कथित बयान किस तरह का संदेश देते हैं।

यहां भी मूल पोस्ट का सत्यापन महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति के बयान को उसके पूरे संदर्भ से काटकर देखने के बजाय मूल पोस्ट, तारीख और संबंधित अकाउंट की प्रामाणिकता की जांच की जानी चाहिए।

क्या BJP की डिजिटल राजनीति में बदलेगा अंदाज?

BJP की नई IT Cell टीम ऐसे समय में सामने आई है जब सोशल मीडिया राजनीतिक विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण मैदान बन चुका है।

नई नियुक्ति के बाद दीपक म्हस्के ने संकेत दिया है कि पार्टी का डिजिटल संगठन प्रचार का जवाब देने और गलत सूचनाओं का मुकाबला करने पर जोर देगा।

लेकिन आलोचकों का सवाल है कि क्या नई टीम केवल पार्टी की छवि को बेहतर बनाने पर काम करेगी या BJP के डिजिटल संचार की भाषा और शैली में भी बदलाव आएगा?

यही वह सवाल है जो नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है।

Gen Z के दौर में सोशल मीडिया की पुरानी रणनीति कितनी कारगर?

वीडियो कार्यक्रम में खास तौर पर Gen Z का जिक्र किया गया है। कार्यक्रम का तर्क है कि युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर राजनीतिक दावों, पुराने पोस्ट और नेताओं के बयानों को तेजी से खोजकर सामने ला रही है।

आज किसी सार्वजनिक व्यक्ति का पुराना ट्वीट या पोस्ट आसानी से गायब नहीं होता। स्क्रीनशॉट, आर्काइव और पुराने डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए वर्षों पुराने बयान भी दोबारा सामने आ सकते हैं।

ऐसे में किसी राजनीतिक दल की डिजिटल रणनीति केवल तेज प्रचार तक सीमित नहीं रह सकती। उसके सामने विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और भाषा की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण चुनौती है।

सवाल सिर्फ BJP IT Cell का नहीं, डिजिटल राजनीति की भाषा का भी है

BJP की नई IT Cell टीम पर उठ रहे सवालों को केवल पार्टी बनाम विपक्ष के राजनीतिक विवाद के रूप में देखना आसान होगा। लेकिन असली सवाल इससे बड़ा है—भारत की राजनीति सोशल मीडिया पर किस तरह की भाषा और नैरेटिव को बढ़ावा दे रही है?

गाली-गलौज, व्यक्तिगत हमले, धार्मिक ध्रुवीकरण और बिना प्रमाण के आरोप लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करते हैं। यह सवाल केवल एक राजनीतिक दल से नहीं बल्कि हर उस संगठन से पूछा जाना चाहिए जो सोशल मीडिया को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है।

BJP के लिए नई IT Cell टीम एक नए दौर की शुरुआत है। अब देखना यह होगा कि दीपक म्हस्के के नेतृत्व में यह टीम केवल चेहरे बदलेगी या डिजिटल राजनीति की भाषा और रणनीति में भी वास्तविक बदलाव दिखाई देगा।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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