स्वरा भास्कर बोलीं- डर थोड़ा कमजोर पड़ा है, सत्ता से सवाल पूछते रहना चाहिए
अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा है कि मौजूदा दौर में नागरिकों के भीतर विरोध और अपनी बात बेबाकी से रखने की भावना को एक नया और रचनात्मक अभिव्यक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जो डर मुख्यधारा के समाज में दिखाई देता था, वह अब कुछ हद तक कमजोर पड़ा है और यह उम्मीद का वक्त है।
स्वरा भास्कर यह बात लेखिका गौहर रज़ा की किताब ‘सरकशी’ के विमोचन के मौके पर एक बातचीत के दौरान कह रही थीं। ‘सरकशी’ और बगावत के विचार को 2026 के संदर्भ में देखते हुए उन्होंने हाल के युवा आंदोलनों का जिक्र किया और कहा कि विरोध की इस नई अभिव्यक्ति में युवाओं का अपना अलग अंदाज और रचनात्मकता दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से देश में अलग-अलग मुद्दों को लेकर असंतोष और विरोध की भावना रही है। हालिया युवा आंदोलन ने इस भावना को एक नया एक्सप्रेशन दिया है।
‘डर थोड़ा कमजोर पड़ा है’
स्वरा के मुताबिक, मौजूदा समय उम्मीद रखने का समय है। उन्होंने कहा कि समाज के एक हिस्से में जो डर बैठ गया था, वह अब थोड़ा कमजोर पड़ा है।
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि फिल्म इंडस्ट्री, जिस दुनिया का वह हिस्सा हैं, उसमें यह डर कितना कम हुआ है, तो उनका जवाब ज्यादा सतर्क था। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बेहद संवेदनशील और कमजोर स्थिति वाली इंडस्ट्री है।
स्वरा ने कहा कि किसी फिल्ममेकर पर दबाव डालना या किसी फिल्म को बैन करवा देना आसान होता है। किसी फिल्म पर रोक लगने से करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है, क्योंकि फिल्मों का बजट बहुत बड़ा होता है।
उनके मुताबिक, फिल्म एक ऐसा कला माध्यम है जो बहुत ज्यादा कमर्शियल दबाव में काम करता है। ऐसे में निर्माता के लिए कारोबार और आर्थिक नुकसान का जोखिम सबसे पहले आता है और कलाकार बाद में।
‘जब समाज बदलेगा, तब फिल्म इंडस्ट्री भी बदलेगी’
स्वरा भास्कर ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव को समाज में होने वाले बदलाव से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने कहा कि जब समाज और मुख्यधारा की सोच बदलेगी, तभी फिल्म इंडस्ट्री में भी बदलाव दिखाई देगा। उनके मुताबिक, हाल के युवा आंदोलनों को जैसे-जैसे मुख्यधारा में स्वीकार्यता मिली, वैसे-वैसे कई कलाकारों ने भी ज्यादा सावधानी के साथ अपनी बात रखनी शुरू की।
अपनी मुखरता और राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रुख को लेकर स्वरा ने अपने फिल्मी करियर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका फिल्मी करियर इस बात का उदाहरण है कि ‘क्या नहीं करना चाहिए’।
उन्होंने कहा कि उनके एक दोस्त ने उन्हें बताया था कि उनके करियर को बिजनेस स्कूल की मार्केटिंग क्लास में ‘ब्रांड को क्या नहीं करना चाहिए’ के उदाहरण के तौर पर पढ़ाया जाता है।
स्वरा के मुताबिक, उन्होंने अपने भीतर के नागरिक को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने माना कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो शायद उनका फिल्मी करियर ज्यादा सफल होता, लेकिन वह अपनी फितरत के हाथों मजबूर हैं।
‘मैं अभिनय से दूरी नहीं बना रही’
फिल्मों से दूरी को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वरा ने स्पष्ट किया कि वह अभिनय छोड़ नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अभिनय करना पसंद है और वह काम करना चाहती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी अभी छोटी है, इसलिए उन्होंने कुछ समय के लिए ब्रेक लिया है।
फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते फॉर्मूला आधारित कंटेंट पर भी उन्होंने बात की। हालांकि उन्होंने कहा कि बॉलीवुड पूरी तरह एक जैसा नहीं है। उनके मुताबिक, नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह जैसे कलाकार लगातार अपनी आवाज उठाते रहे हैं।
स्वरा ने कहा कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि बॉलीवुड पूरी तरह खामोश है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्री में ऐसे कई कलाकार हैं जो लगातार अपनी बात रखते रहे हैं।
‘नसीर साहब ट्रू ब्लू आर्टिस्ट हैं’
नसीरुद्दीन शाह की मुखरता का जिक्र करते हुए स्वरा ने कहा कि वह एक ‘ट्रू ब्लू आर्टिस्ट’ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी कलाकार के राजनीतिक विचारों से असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उसकी अभिनय क्षमता पर सवाल उठाया जाए।
स्वरा के मुताबिक, किसी कलाकार की राजनीति से सहमत या असहमत होना अलग बात है और उसके अभिनय कौशल का मूल्यांकन अलग।
सरकार बदलने पर ही दिखेगा बॉलीवुड पर पूरा असर?
यह पूछे जाने पर कि समाज में बदलते माहौल का असर बॉलीवुड पर कितना पड़ेगा, स्वरा ने कहा कि इसका पूरा प्रभाव तभी दिखाई देगा जब सरकार बदलेगी।
उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संदर्भ में कहा कि यदि फिल्म इंडस्ट्री पर किसी तरह का दबाव कम होता है तो परिस्थितियां बदल सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगली सरकार क्या करेगी, यह कोई नहीं जानता।
स्वरा ने कहा कि नागरिकों को सिर्फ सरकारों पर भरोसा करने के बजाय संविधान, नागरिकता और अपनी जागरूकता पर भरोसा करना चाहिए।
उनका कहना था कि बदलाव सिर्फ सत्ता बदलने से नहीं आएगा, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और सवाल पूछने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
‘बेबाक अभिव्यक्ति का यह दौर जारी रहना चाहिए’
स्वरा भास्कर ने उम्मीद जताई कि 2026 में दिखाई दे रही बेबाक अभिव्यक्ति की यह भावना आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि वह केवल फिल्म इंडस्ट्री की बात नहीं कर रही हैं, बल्कि पूरे सिविल सोसाइटी की बात कर रही हैं।
अपने भविष्य और अपनी भूमिका को लेकर स्वरा ने कहा कि वह खुद को एक जागरूक नागरिक मानती हैं और आगे भी जागरूक नागरिक बने रहना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि सत्ता में चाहे कोई भी आए, नागरिकों को अपना धर्म निभाते हुए सत्ता से लगातार सवाल पूछते रहना चाहिए।
स्वरा ने कहा कि वह हमेशा लोगों और जनता की लड़ाई का हिस्सा बनने की कोशिश करती रही हैं और उनकी अपनी उम्मीद है कि सत्ता के मोह में आए बिना नागरिक सत्ता के प्रति हमेशा सजग और सतर्क रहें।
स्वरा भास्कर का संदेश साफ था—सत्ता कोई भी हो, नागरिकों को सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए और अपनी बेबाक आवाज को बनाए रखना चाहिए।
