7 घंटे के धरने के बाद दर्ज हुई पेलेट गन मामले में रिपोर्ट, साहिल बोले- ‘आपकी आवाज कोई नहीं दबा सकता’
दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर शुक्रवार को कई घंटे चला कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का धरना आखिरकार FIR दर्ज होने के बाद खत्म हुआ। राहुल गांधी 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब के साथ थाने पहुंचे थे। साहिल ने 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से घायल होने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी की मांग थी कि साहिल की शिकायत पर मामले में FIR दर्ज की जाए। रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी सुबह करीब 11 बजे संसद मार्ग थाने पहुंचे और शाम तक वहीं डटे रहे। करीब सात घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने साहिल की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1) समेत संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
‘FIR दर्ज होने तक नहीं हटेंगे’, राहुल गांधी का धरना
राहुल गांधी का कहना था कि साहिल को न्याय दिलाने की दिशा में पहला कदम FIR दर्ज करना है। उनका आरोप था कि एक घायल छात्र को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए भी पुलिस स्टेशन के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ा।
राहुल गांधी ने FIR दर्ज होने के बाद इसे ‘न्याय की दिशा में पहला कदम’ बताया। उन्होंने कहा कि घटना को करीब एक महीना बीत चुका है और साहिल के शरीर में अब भी पेलेट के छर्रे मौजूद हैं। राहुल गांधी के साथ साहिल और उनकी मां भी मौजूद थीं। कांग्रेस नेता ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर एक नागरिक की शिकायत दर्ज कराने में इतना समय लगता है तो आम लोगों के लिए न्याय तक पहुंच की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कौन हैं साहिल लोचाब?
19 वर्षीय साहिल लोचाब उस छात्र प्रदर्शन में शामिल थे, जिसके दौरान 20 जुलाई को दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बीच उनके पेलेट गन से घायल होने का दावा किया गया। साहिल के मुताबिक, उनके शरीर में कई पेलेट लगे और उनकी एक आंख की रोशनी चली गई।
FIR में साहिल ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति को बड़ी बंदूक के साथ देखा था। उन्होंने पुलिस से घटना से संबंधित CCTV और ड्रोन फुटेज सुरक्षित रखने की भी मांग की है।
साहिल ने यह भी कहा कि उनके इलाज की लंबी प्रक्रिया के चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई है और जिस सरकारी नौकरी की तैयारी वह कर रहे थे, उसका अवसर भी उनके हाथ से निकल गया।
‘आपकी आवाज कोई नहीं दबा सकता’
धरना खत्म होने के बाद साहिल ने राहुल गांधी और उनके साथ खड़े लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त से वह FIR दर्ज कराने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें उम्मीद थी कि उनकी शिकायत दर्ज होगी।
साहिल ने देश के छात्रों से कहा कि उन्हें अपनी आवाज को लेकर विश्वास बनाए रखना चाहिए। उनका संदेश था कि किसी छात्र की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना जरूरी है।
उन्होंने इलाज में मदद करने वाले डॉक्टरों का भी धन्यवाद किया और कहा कि उनके उत्साहवर्धन से उन्हें मुश्किल दौर में हिम्मत मिली।
पेलेट गन के इस्तेमाल पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन के कथित इस्तेमाल और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राहुल गांधी लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि 20 जुलाई के प्रदर्शन में पुलिस की कार्रवाई के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से इस आरोप को लेकर अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में FIR दर्ज होना जांच की औपचारिक शुरुआत है; अब जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि साहिल को लगी चोटें किन परिस्थितियों में हुईं और इसके लिए जिम्मेदार कौन था।
FIR में फिलहाल आरोपी के तौर पर अज्ञात व्यक्ति का उल्लेख है। इसका अर्थ है कि FIR दर्ज होने के बावजूद गोली/पेलेट चलाने वाले व्यक्ति की पहचान और घटना की पूरी जिम्मेदारी अभी जांच का विषय है।
‘यह सिर्फ FIR नहीं, जवाबदेही का सवाल है’
राहुल गांधी के इस धरने ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने के मामले में पुलिस शिकायत दर्ज करने और जांच शुरू करने की प्रक्रिया कितनी सहज होनी चाहिए।
राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस मामले को युवाओं, छात्रों और नागरिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार और पुलिस से जवाबदेही की मांग की है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से इस धरने की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे राजनीतिक ‘ड्रामा’ बताते हुए राहुल गांधी पर दूसरे मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। फिलहाल FIR दर्ज हो चुकी है। लेकिन साहिल लोचाब और उनके परिवार के लिए यह अंत नहीं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया की शुरुआत है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में पेलेट गन चलाने वाले व्यक्ति की पहचान होती है या नहीं और घायल छात्र को इलाज, मुआवजे तथा न्याय के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
