August 19, 2026 6:28 pm
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PM CARES FUND: किसकी CARE, किसका FUND?

PM CARES Fund के 2024-25 खातों में ₹8,452.95 करोड़ का बैलेंस और सिर्फ ₹87.85 लाख का भुगतान दर्ज है। ₹324.65 करोड़ की वापसी और पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल जानिए।

₹8,452 करोड़ जमा, एक साल में खर्च सिर्फ ₹87.85 लाख

PM CARES Fund एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोविड-19 महामारी के दौरान आपात स्थितियों और राहत कार्यों के लिए बनाए गए इस फंड में 2024-25 के अंत तक करीब ₹8,452.95 करोड़ की राशि मौजूद थी। लेकिन इसी वित्त वर्ष में फंड से दर्ज भुगतान सिर्फ ₹87.85 लाख रहा।

यानी 31 मार्च 2025 को मौजूद कुल राशि के मुकाबले सालभर में किया गया खर्च लगभग 0.01 फीसदी रहा। यही आंकड़ा अब PM CARES Fund के इस्तेमाल, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹87.85 लाख का आंकड़ा पूरे फंड के अब तक के खर्च का नहीं, बल्कि वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज भुगतान का है।

दो साल से ज्यादा की देरी के बाद सामने आया 2024-25 का हिसाब

PM CARES Fund की वित्तीय जानकारी को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। 2022-23 के ऑडिट स्टेटमेंट को भी काफी देरी के बाद सार्वजनिक किए जाने पर सवाल उठे थे। अब 2024-25 के ऑडिटेड अकाउंट्स सार्वजनिक होने के बाद फंड में जमा रकम और उस साल हुए भुगतान का अंतर चर्चा का विषय बना है।

PM CARES की वेबसाइट के अनुसार, फंड का ऑडिट एक स्वतंत्र ऑडिटर करता है। फंड के FAQ में यह भी कहा गया है कि Income Tax Act के तहत ऑडिट के लिए कोई निर्धारित वैधानिक समयसीमा नहीं है, हालांकि वित्त वर्ष के अंत में ऑडिट किया जाता है।

यानी विवाद सिर्फ इस बात का नहीं है कि ऑडिट हुआ या नहीं, बल्कि यह भी है कि वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक तौर पर कितनी देर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

₹8,452.95 करोड़ कैसे पहुंची फंड की राशि?

2024-25 की Receipts and Payments Accounts के मुताबिक वित्त वर्ष की शुरुआत में PM CARES Fund के पास बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट को मिलाकर करीब ₹7,173 करोड़ की राशि थी।

इस दौरान फंड को नई घरेलू और विदेशी प्राप्तियां भी हुईं। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक घरेलू योगदान करीब ₹479 करोड़ और विदेशी योगदान करीब ₹0.93 करोड़ रहा। इसके अलावा ब्याज और अन्य प्राप्तियों सहित वर्ष के दौरान कुल प्राप्तियां करीब ₹1,289 करोड़ रहीं।

इन तमाम मदों के बाद वित्त वर्ष के अंत में फंड का बैलेंस बढ़कर करीब ₹8,452.95 करोड़ हो गया। ताजा रिपोर्टों में भी 31 मार्च 2025 को फंड की राशि करीब ₹8,452 करोड़ बताई गई है।

लेकिन खर्च? सिर्फ ₹87.85 लाख

अब सबसे बड़ा सवाल भुगतान को लेकर है।

2024-25 की Payments में PM CARES Fund से PM CARES for Children Scheme के लिए करीब ₹87,84,840 का भुगतान दर्ज है।

इसके अलावा बैंक और SMS चार्ज के तौर पर सिर्फ ₹451 का भुगतान दर्ज किया गया।

यानी पूरे साल दर्ज भुगतान करीब ₹87.85 लाख रहा।

₹8,452.95 करोड़ के कुल बैलेंस की तुलना में यह रकम लगभग 0.01 फीसदी बैठती है।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि PM CARES Fund को खुद आधिकारिक तौर पर आपातकालीन और संकट की स्थितियों में सहायता के उद्देश्य से बनाया गया है। फंड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों, आपदाओं और अन्य संकटों में राहत और सहायता प्रदान करना है।

₹324.65 करोड़ वापस भी आए, लेकिन क्यों?

ऑडिटेड खातों में एक और आंकड़ा ध्यान खींचता है—करीब ₹324.65 करोड़ की राशि implementing agencies की ओर से वापस की गई।

यहीं पारदर्शिता से जुड़ा एक अहम सवाल उठता है: यह पैसा किन एजेंसियों को किस काम के लिए दिया गया था? कितना पैसा खर्च हुआ? कितना वापस आया? और वापस करने की वजह क्या थी?

RTI और पारदर्शिता के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज ने भी इस वित्तीय जानकारी को सामने रखते हुए फंड में इतनी बड़ी राशि के निष्क्रिय पड़े रहने और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं।

भारद्वाज पहले भी PM CARES Fund से जुड़े दस्तावेज और RTI जवाब सामने लाती रही हैं। 2020 में उनके RTI आवेदन के जरिए PM CARES से खरीदे गए वेंटिलेटरों और उनके वितरण से संबंधित जानकारी सामने आई थी।

क्या इमरजेंसी फंड का इतना बड़ा हिस्सा जमा रहना सवाल नहीं?

PM CARES Fund का गठन मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। आधिकारिक तौर पर इसका उद्देश्य सिर्फ कोविड तक सीमित नहीं था, बल्कि भविष्य की आपात स्थितियों, आपदाओं और संकट के समय राहत उपलब्ध कराना भी था।

आज देश में बाढ़, भूस्खलन, विस्थापन, स्वास्थ्य संबंधी संकट और दूसरी आपदाएं लगातार सामने आती रहती हैं। ऐसे में सवाल यह है कि एक आपातकालीन राहत फंड में हजारों करोड़ रुपये की राशि मौजूद रहने के बावजूद उसका इस्तेमाल किस तरीके से और किन परिस्थितियों में किया जाता है?

यहां यह भी समझना जरूरी है कि किसी आपातकालीन फंड में रिजर्व राशि रखना अपने आप में गलत नहीं है। सवाल रिजर्व की मात्रा से ज्यादा उसके इस्तेमाल के नियम, निर्णय प्रक्रिया और सार्वजनिक जवाबदेही का है।

PM CARES कौन चलाता है?

PM CARES की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक प्रधानमंत्री इसके ex-officio Chairman हैं। रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके ex-officio Trustees हैं। प्रधानमंत्री ने दो अन्य ट्रस्टियों को भी बोर्ड में नामित किया है।

फंड के मुताबिक इसमें सरकारी बजटीय सहायता नहीं आती और यह स्वैच्छिक योगदान से संचालित होता है। इसे विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए FCRA के तहत छूट भी प्राप्त है।

यही संरचना इस सवाल को और महत्वपूर्ण बनाती है कि फंड की गतिविधियों और वित्तीय निर्णयों की सार्वजनिक निगरानी किस स्तर पर होनी चाहिए।

RTI और CAG को लेकर पुराना विवाद

PM CARES Fund की पारदर्शिता को लेकर विवाद नया नहीं है।

सरकार का रुख रहा है कि PM CARES एक Public Charitable Trust है और RTI Act के तहत “public authority” नहीं है। दूसरी ओर, पारदर्शिता कार्यकर्ता लंबे समय से तर्क देते रहे हैं कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता, केंद्रीय मंत्रियों की ट्रस्टी के तौर पर भूमिका, सरकारी तंत्र से जुड़ी संरचना और सार्वजनिक अपीलों के जरिए जुटाई गई राशि को देखते हुए फंड की अधिक सार्वजनिक जवाबदेही होनी चाहिए।

PM CARES Fund का ऑडिट CAG के बजाय एक स्वतंत्र ऑडिटर द्वारा किया जाता है। आधिकारिक FAQ में SARC & Associates को ऑडिटर नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

2025 में भी PM CARES के वित्तीय दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। उस समय उपलब्ध रिपोर्टों में कहा गया था कि 2022-23 के ऑडिट स्टेटमेंट लंबे अंतराल के बाद वेबसाइट पर अपलोड किए गए और ऑडिटर के नोट्स की पूर्ण उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे।

संसद में सवाल पूछने को लेकर भी विवाद

PM CARES की जवाबदेही को लेकर एक और सवाल संसद से जुड़ा है।

2026 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक PMO ने लोकसभा सचिवालय को बताया था कि PM CARES Fund से संबंधित प्रश्न और अन्य संसदीय हस्तक्षेप सदन में स्वीकार्य नहीं हैं। इस मुद्दे को लेकर भी पारदर्शिता कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए।

यानी एक तरफ फंड में नागरिकों और संस्थाओं से पैसा जमा होता है, दूसरी तरफ RTI और संसदीय निगरानी के दायरे को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है।

सवाल फंड में पैसा कितना है, सिर्फ इतना नहीं

PM CARES Fund पर बहस को सिर्फ इस सवाल तक सीमित करना ठीक नहीं होगा कि एक साल में कितना पैसा खर्च हुआ।

असल सवाल इससे आगे जाते हैं—

  • किस काम के लिए पैसा स्वीकृत किया गया?
  • किस एजेंसी को कितना पैसा दिया गया?
  • कितना पैसा खर्च हुआ?
  • कितना पैसा वापस आया?
  • पैसा वापस क्यों आया?
  • फंड में इतनी बड़ी राशि किस रूप में रखी गई है?
  • आपातकालीन परिस्थितियों में इस राशि को इस्तेमाल करने की प्रक्रिया क्या है?
  • और नागरिकों को इन सभी सवालों के जवाब कितनी आसानी से मिल सकते हैं?

लोकतंत्र में किसी भी बड़े सार्वजनिक हित वाले फंड की विश्वसनीयता सिर्फ उसके आकार से नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही से तय होती है।

PM CARES Fund के 2024-25 के आंकड़े अब सार्वजनिक हैं। इसलिए बहस का अगला चरण आरोपों से आगे बढ़कर दस्तावेजों और स्पष्ट जवाबों का होना चाहिए।

आखिर सवाल यही है—PM CARES Fund किसकी CARE के लिए है, किसका FUND है और जनता को इसके इस्तेमाल का पूरा हिसाब कब और कैसे मिलेगा?

मुकुल सरल

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