🌍 लेबनान पर हमलों के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग
इस समय पूरी दुनिया में इज़राइल के खिलाफ गुस्सा फूट रहा है। हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ईरान से लेकर अमेरिका तक, हर जगह एक ही मांग उठ रही है—लेबनान पर हमले तुरंत रोके जाएं और इस्राइल को जवाबदेह ठहराया जाए।
⚠️ सीज़फायर के तुरंत बाद हमले, सवालों के घेरे में इस्राइल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच सीज़फायर की घोषणा के कुछ ही मिनटों के भीतर इस्राइल ने लेबनान पर 100 से अधिक हमले कर दिए। इन हमलों का सबसे बड़ा असर राजधानी बेरूत पर पड़ा, जहां भारी तबाही की खबरें सामने आईं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सुनियोजित विनाश है—एक ऐसा कदम जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध (War Crime) माना जा सकता है।
🇪🇸 स्पेन के प्रधानमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
पेद्रो सांचेज़ ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “वॉर क्रिमिनल” बताया है। उन्होंने मांग की है कि नेतन्याहू को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
साथ ही उन्होंने यूरोपीय संघ से अपील की है कि वह इस्राइल के साथ अपने सभी राजनीतिक और आर्थिक संबंधों की समीक्षा करे और जरूरत पड़े तो उन्हें समाप्त करे।
🇺🇸 न्यूयॉर्क से उठी आवाज़
अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर में भी बड़ी संख्या में लोग जुटे और इस युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहा, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध बन चुका है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वैश्विक शक्तियाँ जानबूझकर इस युद्ध को खत्म नहीं होने देना चाहतीं। उनका मानना है कि इस्राइल की रणनीति लेबनान और ईरान दोनों को पूरी तरह तबाह करने की है।
🔥 क्या है इस संघर्ष के पीछे की मंशा?
आलोचकों का कहना है कि इस्राइल की वर्तमान सैन्य नीति का लक्ष्य सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित करना है। लेबनान और ईरान के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया है—एक तरफ वे देश हैं जो इस्राइल का समर्थन कर रहे हैं, और दूसरी तरफ वे जो इसे खुला युद्ध अपराध मान रहे हैं।
