September 11, 2026 8:40 pm
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Sexual harassment के आरोप से हड़कंप मचा योगी खेमे में

उत्तर प्रदेश सूचना विभाग से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों और कथित AI-generated वीडियो को लेकर विवाद। अभिषेक उपाध्याय के इंटरव्यू में महिला ने लगाए गंभीर आरोप।

यूपी सूचना विभाग से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों ने उठाए गंभीर सवाल, AI कंटेंट को लेकर भी दावा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम और राज्य के सूचना विभाग से जुड़े कामकाज को लेकर एक महिला ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। पत्रकार और यूट्यूबर अभिषेक उपाध्याय के एक इंटरव्यू में सामने आए इन आरोपों में उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक विशाल सिंह का भी संदर्भ आया है।

महिला का दावा है कि उन्होंने अपने साथ कथित यौन उत्पीड़न को लेकर आधिकारिक तौर पर ईमेल के जरिए शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इंटरव्यू में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर राजनीतिक संगठनों से अपने संबंधों का हवाला देते हुए उन्हें यह अहसास कराया कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।

‘मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते’—महिला का आरोप

अभिषेक उपाध्याय के साथ बातचीत में महिला ने दावा किया कि उनके साथ काम करने वाले एक व्यक्ति की ओर से उन्हें असहज करने वाली टिप्पणियां और व्यवहार झेलना पड़ा। उनका कहना है कि उन्होंने इस संबंध में शिकायत की और संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाने की कोशिश की।

महिला के मुताबिक, उन्हें कथित तौर पर यह भी कहा जाता था कि संबंधित व्यक्ति के राजनीतिक संगठनों से संबंध हैं और उसके खिलाफ कुछ नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला और अंततः उन्हें वहां से चुपचाप चले जाने के लिए कहा गया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस कार्यक्रम के ट्रांसक्रिप्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं का पक्ष भी इस रिपोर्ट में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।

सूचना निदेशक विशाल सिंह का नाम क्यों आया?

पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला की शिकायत कथित तौर पर किन अधिकारियों तक पहुंची और उस पर क्या कार्रवाई हुई।

महिला के बयान के मुताबिक, मामला उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक विशाल सिंह तक भी पहुंचा था। उनका दावा है कि इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज हुई थी, क्या विभागीय जांच शुरू की गई और क्या संबंधित कंपनी या अधिकारियों ने शिकायत की जांच की।

इन सवालों के जवाब संबंधित पक्षों से मिलने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।

AI-generated वीडियो को लेकर भी गंभीर दावा

इंटरव्यू में यौन उत्पीड़न के आरोपों के अलावा एक दूसरा गंभीर दावा भी सामने आया। महिला ने कथित तौर पर अपने कार्यालय में विपक्षी नेताओं से संबंधित आपत्तिजनक AI-generated वीडियो क्लिप देखे जाने की बात कही।

पूछे जाने पर उन्होंने दावा किया कि इनमें समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से संबंधित वीडियो भी शामिल थे।

उनके मुताबिक, इन वीडियो में ऐसे दृश्य बनाए गए थे जिनमें लोगों को अखिलेश यादव को गाली देते, उनका पीछा करते या उन पर हमला करने के लिए दौड़ते हुए दिखाया गया था।

यह दावा यदि सत्यापित होता है तो सरकारी या सार्वजनिक धन के इस्तेमाल, राजनीतिक प्रचार और AI-generated misinformation के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि कथित वीडियो किस संस्था या व्यक्ति ने बनाए थे, किस उद्देश्य से बनाए गए और उनके निर्माण के लिए धन कहां से आया।

अखिलेश यादव ने कार्रवाई की मांग की

इन आरोपों के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता और सांसद अखिलेश यादव ने मामले पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने महिला आयोग के साथ-साथ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग की।

अखिलेश यादव ने कथित तौर पर विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने के लिए AI वीडियो बनाए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए।

उनका कहना था कि यदि सरकारी बजट का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ नकारात्मक प्रचार और उनकी छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

ट्रांसक्रिप्ट में उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़ी हेल्पलाइन में काम करने वाली महिलाओं के पुराने विरोध-प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया गया है। कार्यक्रम में दावा किया गया कि इन महिलाओं ने सम्मानजनक व्यवहार, वेतन और कार्यस्थल पर कथित दुर्व्यवहार को लेकर शिकायतें की थीं।

हालांकि, इन पुराने मामलों और मौजूदा आरोपों के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि जरूरी होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल: कार्रवाई होगी या नहीं?

इस पूरे मामले में कई सवाल सामने आते हैं:

  • क्या महिला की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज हुई थी?
  • यदि हुई थी, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?
  • क्या सूचना निदेशक विशाल सिंह को शिकायत की जानकारी थी?
  • संबंधित कंपनी या एजेंसी ने आरोपों पर क्या कार्रवाई की?
  • कथित AI-generated वीडियो किसने बनाए?
  • क्या इनके निर्माण में सरकारी या सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हुआ?
  • क्या इस पूरे मामले की कोई स्वतंत्र या विभागीय जांच होगी?

ये सभी सवाल अब उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो तथा शिकायतकर्ता और आरोपित—दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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