September 9, 2026 5:14 pm
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दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की हत्या

दिल्ली में 54 वर्षीय मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या ने नस्ली हिंसा, पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा और राजधानी की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नस्ली हिंसा के साथ कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल

राजधानी दिल्ली में 54 वर्षीय मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या ने नस्ली हिंसा, पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भेदभाव और राजधानी की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि घर के बाहर शोर कर रहे कुछ लोगों को शांत कराने निकले विक्रम सिंह के साथ मारपीट की गई। अस्पताल में अगले दिन उनकी मौत हो गई।

देश की राजधानी दिल्ली में मणिपुर के रहने वाले संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या ने एक बार फिर राजधानी में पूर्वोत्तर भारत के लोगों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले कथित नस्ली भेदभाव पर बहस छेड़ दी है।

54 वर्षीय विक्रम सिंह लंबे समय से दिल्ली में रह रहे थे। करीब 17 वर्षों से राजधानी में रहने वाले विक्रम सिंह मणिपुर की पश्चिमी संगीत परंपरा और गिटार संस्कृति से जुड़े एक जाने-माने संगीतकार के तौर पर पहचाने जाते थे। लेकिन उनकी मौत अब सिर्फ एक आपराधिक घटना के तौर पर नहीं देखी जा रही है। घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या दिल्ली में पूर्वोत्तर के लोगों को उनकी पहचान के कारण हिंसा का सामना करना पड़ रहा है?

घर के बाहर निकले थे, भीड़ ने किया हमला

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, विक्रम सिंह अपने घर से उस समय बाहर निकले थे जब कुछ लोग कथित तौर पर शोर कर रहे थे। बताया गया है कि वह उन्हें शांत कराने के लिए बाहर गए थे।

इसी दौरान कथित तौर पर हमलावरों ने उनकी मणिपुरी पहचान को लेकर आपत्तिजनक व्यवहार किया और उनका पीछा किया। विक्रम सिंह भागते हुए अपने घर के पास तक पहुंचे, लेकिन आरोप है कि वहां भी उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।

घटना से जुड़े CCTV फुटेज को लेकर सामने आए विवरण में भीड़ को विक्रम सिंह के साथ मारपीट करने के बाद वहां से जाते हुए देखा गया है। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां अगले दिन उनकी मौत हो गई।

यह घटना कई स्तरों पर सवाल खड़े करती है। पहला सवाल हिंसा के पीछे मौजूद कथित नस्ली पूर्वाग्रह का है। दूसरा और उतना ही गंभीर सवाल यह है कि राजधानी के एक रिहायशी इलाके में कथित तौर पर इतनी हिंसा कैसे हुई और कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियां समय रहते इसे रोक क्यों नहीं सकीं?

क्या विक्रम सिंह को उनकी पहचान की वजह से निशाना बनाया गया?

मणिपुर और पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ देश के दूसरे हिस्सों में नस्ली टिप्पणियों और भेदभाव की शिकायतें नई नहीं हैं। दिल्ली भी इससे अछूती नहीं रही है।

विक्रम सिंह की हत्या के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी मणिपुरी पहचान हिंसा का एक कारण बनी। यदि जांच में यह बात सामने आती है कि उन्हें उनकी नस्ली या क्षेत्रीय पहचान के कारण निशाना बनाया गया था, तो यह महज हत्या का मामला नहीं रह जाएगा, बल्कि राजधानी में नस्ली हिंसा और भेदभाव की गंभीर समस्या की ओर भी इशारा करेगा।

यही वजह है कि मणिपुरी समुदाय और पूर्वोत्तर के लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और नस्ली हिंसा के पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए।

राहुल गांधी ने भी उठाया दिल्ली पुलिस पर सवाल

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने घटना को लेकर दिल्ली की कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका सवाल है कि राजधानी में किसी व्यक्ति को उसके घर के सामने कथित तौर पर पीट-पीटकर अधमरा किए जाने तक पुलिस क्या कर रही थी?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घटना किसी दूरदराज के इलाके में नहीं, बल्कि देश की राजधानी के एक रिहायशी इलाके में हुई बताई जा रही है।

सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, व्यवस्था का है

किसी भी गंभीर आपराधिक घटना के बाद सबसे पहला सवाल होता है कि आरोपियों की गिरफ्तारी हुई या नहीं और उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिलेगी या नहीं। लेकिन विक्रम सिंह की मौत का मामला इससे कहीं बड़ा सवाल सामने रखता है।

सवाल यह है कि राजधानी में कानून का डर कहां था?

यदि CCTV कैमरों के सामने किसी व्यक्ति के साथ कथित तौर पर भीड़ हिंसा करती है और उसके बाद वहां से निकल जाती है, तो यह केवल कुछ व्यक्तियों के आपराधिक व्यवहार का मामला नहीं है। यह पुलिस की मौजूदगी, त्वरित प्रतिक्रिया और राजधानी की कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाता है।

महारानी बाग क्षेत्र से जुड़ी इस घटना के संदर्भ में स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका और घटना के समय उसकी प्रतिक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है। साथ ही यह भी पता लगाना जरूरी है कि क्या हिंसा के पीछे नस्ली पूर्वाग्रह था और क्या आरोपियों ने विक्रम सिंह की पहचान को लेकर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी या व्यवहार किया।

दिल्ली सरकार और पुलिस की चुप्पी पर सवाल

घटना के बाद मणिपुरी समुदाय में पैदा हुए आक्रोश ने दिल्ली सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार और समुदाय के लिए केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। उन्हें यह भरोसा भी चाहिए कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि नस्ली हिंसा का कोण सामने आता है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

राजधानी में रहने वाले पूर्वोत्तर के नागरिकों के लिए यह घटना एक बड़े सवाल को सामने लाती है—क्या दिल्ली वास्तव में सभी नागरिकों के लिए समान रूप से सुरक्षित है?

विक्रम सिंह की हत्या सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं

चोंगथम विक्रम सिंह की पहचान केवल एक पीड़ित के रूप में नहीं थी। वह लंबे समय से दिल्ली में रह रहे संगीतकार थे और मणिपुर की पश्चिमी संगीत तथा गिटार संस्कृति के प्रतिनिधि के तौर पर अपनी पहचान बना चुके थे।

उनकी हत्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस विरोधाभास को सामने लाती है जिसमें देश की राजधानी अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों को अपने भीतर समेटे होने का दावा करती है, लेकिन उन्हीं लोगों की सुरक्षा को लेकर बार-बार सवाल उठते हैं।

इस मामले में जांच को केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि हमला किसने किया। यह भी सामने आना चाहिए कि हमले की वजह क्या थी, क्या इसमें नस्ली पूर्वाग्रह की भूमिका थी, पुलिस को घटना की जानकारी कब मिली, उसकी प्रतिक्रिया क्या थी और ऐसी हिंसा को रोकने के लिए व्यवस्था ने क्या किया।

विक्रम सिंह की मौत का इंसाफ केवल आरोपियों की गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि उन सवालों के जवाब से भी तय होगा जो यह घटना दिल्ली की कानून-व्यवस्था और समाज में मौजूद नस्ली पूर्वाग्रह के सामने रखती है।

भाषा सिंह

1971 में दिल्ली में जन्मी, शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की। 1996 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
'अमर उजाला', 'नवभारत टाइम्स', 'आउटलुक', 'नई दुनिया', 'नेशनल हेराल्ड', 'न्यूज़क्लिक' जैसे
प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों

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