March 29, 2026 7:54 pm
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नेपाल नई सरकार बनते ही सियासी भूचाल

नेपाल में नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने शपथ के एक दिन बाद पूर्व PM केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार किया। जानिए GenZ आंदोलन, राजनीतिक बदलाव और इसके मायने।

नए प्रधानमंत्री बालेन शाह की कार्रवाई से पूर्व PM केपी शर्मा ओली गिरफ्तार

नेपाल की राजनीति एक बार फिर बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले बालेन शाह ने सत्ता संभालते ही एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। शपथ ग्रहण के महज एक दिन बाद, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया।

यह कार्रवाई 2025 में हुए चर्चित ‘GenZ आंदोलन’ के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी है, जिसमें करीब 76 लोगों की मौत हुई थी। जांच पैनल ने इस मामले में गंभीर जिम्मेदारी तय करते हुए पूर्व सरकार के शीर्ष नेताओं के खिलाफ सजा की सिफारिश की थी।

GenZ आंदोलन से सत्ता परिवर्तन तक

2025 में नेपाल में युवा नेतृत्व वाले ‘GenZ आंदोलन’ ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। इस आंदोलन ने न केवल तत्कालीन सरकार को गिराया, बल्कि देश में एक नई राजनीतिक चेतना भी पैदा की। इसके बाद हुए आम चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को भारी बहुमत मिला।

इस जीत के साथ ही काठमांडू के पूर्व मेयर और चर्चित युवा चेहरा बालेन शाह देश के प्रधानमंत्री बने। उनका उदय नेपाल की राजनीति में एक नई पीढ़ी के प्रवेश का संकेत माना जा रहा है।

गिरफ्तारी: न्याय या राजनीतिक बदला?

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनकी पार्टी CPN-UML ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और उन्हें बदनाम करने की साजिश है।

ओली के वकीलों ने इस गिरफ्तारी को अदालत में चुनौती दी है, जिससे आने वाले दिनों में इस मामले का कानूनी पहलू और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।

बांग्लादेश से तुलना, लेकिन बड़ा फर्क

नेपाल की मौजूदा स्थिति की तुलना कुछ लोग बांग्लादेश की राजनीति से कर रहे हैं, खासकर वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संदर्भ में।

लेकिन यहां एक अहम अंतर है। जहां शेख हसीना को सत्ता संकट के दौरान देश छोड़ना पड़ा, वहीं केपी शर्मा ओली ने नेपाल में रहकर चुनाव लड़ा और जनता का सामना किया। अब वे कानूनी प्रक्रिया का भी सामना कर रहे हैं। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा सकता है।

संक्रमण के दौर में नेपाल

नेपाल इस समय एक संक्रमण (ट्रांजिशन) के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ पुराने राजनीतिक ढांचे और चेहरे धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी सत्ता में आ रही है।

लेकिन असली चुनौती अब शुरू होती है—

  • क्या नई सरकार न्याय और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठा पाएगी?
  • क्या यह कार्रवाई संस्थागत जवाबदेही का उदाहरण बनेगी या राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देखी जाएगी?
  • और सबसे अहम, क्या नेपाल की राजनीति वाकई बदलेगी या पुराने ढर्रे पर लौट जाएगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले समय में नेपाल की दिशा तय करेंगे।

मुकुल सरल

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