March 23, 2026 9:05 pm
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लग्ज़री बोट में बैठकर रेखा गुप्ता सरकार करेगी यमुना की सफाई!

दिल्ली सरकार की यमुना निरीक्षण के लिए 6.2 करोड़ की लग्जरी बोट योजना पर सवाल। क्या यह सफाई है या वीआईपी कल्चर का नया रूप?

यमुना के काले, झागदार पानी की चिंता नहीं, बोट के लिए टेंडर निकाले

दिल्ली में यमुना नदी की हालत किसी से छिपी नहीं है। काले पानी, झाग और बदबू से भरी यह नदी राजधानी की सबसे बड़ी पर्यावरणीय विफलताओं में से एक बन चुकी है। ऐसे में जब सरकार की प्राथमिकता सफाई के ठोस उपायों की बजाय ‘निरीक्षण’ के लिए लग्जरी बोट खरीदना बन जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है।

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने 12 मार्च को करीब 6 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से दो लग्जरी बोट खरीदने का टेंडर जारी किया। इन बोट्स का इस्तेमाल यमुना नदी के निरीक्षण के लिए किया जाना है, जहां वीआईपी और वीवीआईपी बैठकर नदी का “नजारा” भी ले सकेंगे और निरीक्षण भी करेंगे।

विपक्ष का हमला और सरकार बैकफुट पर

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यमुना की गंदगी नंगी आंखों से साफ दिखती है और उसके कारण भी किसी से छिपे नहीं हैं। सवाल यह है कि जब समस्या स्पष्ट है, तो क्या उसके समाधान के लिए लग्जरी बोट की जरूरत है या फिर ठोस नीतिगत हस्तक्षेप की?

इस खबर के सामने आते ही विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने सरकार पर हमला बोला। यह वही सरकार है जिसने अरविंद केजरीवाल की सरकार पर वीआईपी कल्चर, भ्रष्टाचार और ‘शीश महल’ जैसे आरोप लगाकर सत्ता हासिल की थी।

विवाद बढ़ने के बाद सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा को बैकफुट पर आना पड़ा। उन्होंने इस टेंडर की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि इसकी शर्तों में बदलाव किया जाएगा।

असली समस्या: नाले और औद्योगिक कचरा

लेकिन यह मामला केवल बोट खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करता है। दिल्ली में सैकड़ों नाले सीधे यमुना में गिरते हैं, और उद्योगों का जहरीला कचरा बिना किसी ट्रीटमेंट के नदी में छोड़ा जाता है। असली जरूरत इन स्रोतों को रोकने की है—न कि नदी पर लग्जरी क्रूज चलाने की।

इससे पहले भी सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठते रहे हैं। यमुना की सफाई न होने के बावजूद छठ पूजा के लिए कृत्रिम “बिसलेरी घाट” बनवाया गया। वायु प्रदूषण के नाम पर कृत्रिम बारिश का दावा किया गया, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद एक बूंद बारिश नहीं हुई। शहर की सड़कों पर गड्ढे तक नहीं भरे जा सके, जिनमें गिरकर कई लोगों की जान चली गई।

दिखावे की राजनीति बनाम असली समाधान

अब उसी सरकार को यमुना की सफाई के नाम पर करोड़ों की लग्जरी बोट चाहिए। विशेषज्ञों की जरूरत नहीं, ठोस नीति की जरूरत नहीं—बल्कि दिखावे की राजनीति जारी है।

यहां तक कि यमुना पर क्रूज चलाने की भी बात हो रही है। यानी असली सवाल—यमुना कैसे साफ होगी—इस पर कोई गंभीर चिंता नहीं है। पूरी कवायद का मकसद सिर्फ यह दिखाना है कि सरकार कुछ “बड़ा” कर रही है।

कह सकते हैं कि यह सिर्फ यमुना की कहानी नहीं है, बल्कि उस राजनीति की तस्वीर है जहां समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि उनका प्रदर्शन ज्यादा अहम हो गया है।

मुकुल सरल

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